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ओम बिरला ने टीएमसी के बागी सांसदों को दिया 22 सितंबर तक समय, अभिषेक बनर्जी ने की थी अयोग्य ठहराने की मांग

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों को 22 सितंबर तक का समय दिया है। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Sep 03, 2026

Om Birla

ओम बिरला (Photo - ANI)

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने तृणमूल कांग्रेस - टीएमसी (Trinamool Congress - TMC) के 20 बागी सांसदों को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया - एनसीपीआई (Nationalist Citizens Party of India - NCPI) से जुड़ने के मामले में जवाब देने के लिए 22 सितंबर तक समय दिया है।

टीएमसी ने की थी अयोग्य ठहराने की मांग

टीएमसी ने इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिका लगाईं थी। इसी याचिका पर जवाब के लिए बिरला ने बागी सांसदों को समय दिया है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने इसी साल जून में इन 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये सांसद टीएमसी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए थे, लेकिन पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हो गए।

एनसीपीआई ने मांगा था समय

एनसीपीआई के लोकसभा फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय और अन्य सांसदों ने बिरला को पत्र लिखकर कहा था कि बनर्जी की याचिका में कई मुद्दे हैं, जिनका विस्तृत जवाब तैयार करने के उन्हें समय चाहिए। उन्होंने 22 सितंबर तक का समय मांगा था और बिरला ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें समय दे दिया है।

क्या है बागी सांसदों का दावा?

बागी सांसद दावा करते हैं कि उन्होंने दो-तिहाई बहुमत के साथ एनसीपीआई में वैध विलय किया है, इसलिए अयोग्यता का प्रावधान लागू नहीं होता। वहीँ टीएमसी इसे अवैध बता रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी मुकदमा चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 18 सितंबर को अगली सुनवाई तय की है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मामला सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी पेश हुए, जबकि लोकसभा स्पीकर की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मौजूद रहे। मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लोकसभा स्पीकर ने मामले में पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है और सभी 20 सांसदों से जवाब मांगा गया है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि स्पीकर को अलग से औपचारिक नोटिस जारी करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वह स्पीकर की ओर से सुप्रीम कोर्ट की सहायता करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया।

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