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Om Birla no confidence motion: ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कल; आसन नहीं, सत्तापक्ष में बैठेंगे

Lok Sabha no confidence motion against Om Birla: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। बजट सत्र में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जिसमें विपक्ष के कई सांसदों ने समर्थन दिया है। जानिए पूरा मामला और संसद की सियासी हलचल।

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Om Birla

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव। (Photo - IANS)

No confidence motion against Om Birla: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से दिए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है। बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में इस प्रस्ताव को शामिल किया गया है। सदन में कम से कम 50 सांसदों के समर्थन के बाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी। चर्चा के दौरान ओम बिरला अध्यक्षीय आसन पर नहीं, बल्कि सदन में सत्तापक्ष के सदस्यों के साथ मौजूद रहकर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का जवाब दे सकेंगे।

दरअसल, बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लगातार हंगामे और गतिरोध के बीच कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के 118 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। अब इस प्रस्ताव को सोमवार को सदन में विपक्षी सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और डॉ. मल्लू रवि पेश करेंगे। इसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश देते हुए व्हिप जारी किया है। टीएमसी ने भी विपक्ष के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की है।

अध्यक्ष नहीं, पैनल के सदस्य चलाएंगे सदन

संसदीय परंपरा के मुताबिक, अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संबंधित अध्यक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलाते। वह अध्यक्षीय आसन पर नहीं बैठते, बल्कि एक सदस्य के रूप में सदन में मौजूद रह सकते हैं और बहस में भाग लेकर अपना पक्ष रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में सदन की कार्यवाही उपाध्यक्ष या पैनल ऑफ चेयरपर्सन में शामिल सदस्य संचालित करते हैं। फिलहाल लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है, ऐसे में पैनल में शामिल सांसद ही कार्यवाही का संचालन करेंगे।

संख्या नहीं, दबाव की सियासत

लोकसभा में विपक्ष के पास अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। इसके बावजूद विपक्ष ने इस प्रस्ताव के जरिए सरकार और आसन पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।

तीन बार आया प्रस्ताव और गिर गया

  1. 1954 में तत्कालीन अध्यक्ष जी. वी. मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने प्रस्ताव पेश किया था, पर सदन में इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया गया।
  2. 1966 में तत्कालीन अध्यक्ष सरदार हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव समाजवादी नेता मधु लिमये ने पेश किया था। इस पर चर्चा भी हुई, पर अंत में यह प्रस्ताव गिर गया।
  3. 1987 में तत्कालीन अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ सोमनाथ चटर्जी ने प्रस्ताव पेश किया, पर मतदान में इसे जरूरी बहुमत नहीं मिला और प्रस्ताव गिर गया।