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पंचायत से संसद तक बढ़ती महिलाओं की भागीदारी, बाबा साहेब के विजन की झलक: ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महिलाओं की भागीदारी पर अपने विचार रखे। इस दौरान बिरला ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस महान विजन को साकार कर रही हैं।

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 15, 2026

Lok Sabha Speaker Om Birla

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फोटो- ANI)

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने अंबेडकर जयंति के अवसर पर महिलाओं की भागीदारी पर अपने विचार रखे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस महान विजन को साकार कर रही है, जिसमें समाज के हर वर्ग खासकर वंचित, दलित और पिछड़े तबकों को समान अधिकार और अवसर देने की परिकल्पना की गई थी।

अबंडकर जयंति के अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ओम बिरला ने कहा कि समानता, न्याय और सामाजिक परिवर्तन के बाबा साहेब के सिद्धांत आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। बिरला ने कहा- बाबा साहेब के विचार आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज में साहस, आत्मविश्वास और सेवा भावना विकसित करनी है तो हमें डॉ. आंबेडकर के आदर्शों को अपनाना होगा।

कठिन परिस्थिति के बावजूद अंबेडकर ने उच्चतम शिक्षा प्राप्त की

लोकसभा अध्यक्ष ने बाबा साहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और स्पष्ट लक्ष्य से उन्होंने उच्चतम शिक्षा प्राप्त की। लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को त्यागकर राष्ट्र सेवा को चुना। बिरला ने कहा कि बाबा साहेब ने अपने जीवन से साबित किया कि चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियाँ क्यों न हों, सच्ची लगन और संकल्प से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

ओम बिरला ने इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ की ;'बाल संविधान पुस्तक शृंखला' का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर नागरिक को संविधान के मूल्यों, प्रावधानों और आदर्शों की जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को स्कूली शिक्षा के शुरुआती दौर से ही संविधान की समझ दी जानी चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।बिरला ने कहा कि संविधान की शिक्षा से ही एक मजबूत, समावेशी और विकसित भारत का निर्माण संभव है।