
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (Photo-IANS)
JP Nadda's Birthday: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा (JP Nadda) की शख्सियत पांच अनछुए पहलुओं से समृद्ध है। इनसे उनके सारे व्यक्तित्व को समझा जा सकता है। वे एक ऐसे राजनेता हैं, जिनकी छवि मुख्य रूप से एक कुशल रणनीतिकार और संगठनकर्ता की है। लेकिन नड्डा की शख्सियत के कई ऐसे पहलू हैं, जो राजनीतिक पटल से परे हैं और जो उनके चरित्र की गहराई को उजागर करते हैं।
जे.पी. नड्डा का जन्म 2 दिसंबर 1960 को पटना में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता डॉ. नारायण लाल नड्डा पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे और बाद में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति बने। लेकिन नड्डा के बचपन की सबसे रोचक कहानी खेलों से जुड़ी है। स्कूली दिनों में वे एक उत्कृष्ट तैराक थे। संत जेवियर्स स्कूल, पटना से शिक्षा ग्रहण करने वाले नड्डा ने राज्य स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व किया। वे ऑल इंडिया जूनियर स्विमिंग चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए दिल्ली गए, जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह तथ्य कम ही लोगों को पता है कि नड्डा न केवल स्विमिंग में, बल्कि एथलेटिक्स में भी स्कूल चैंपियन रहे।
यह खेलों का जुनून नड्डा के व्यक्तित्व का एक अनछुआ कोण है। राजनीति में प्रवेश के बाद भी, वे अक्सर युवाओं को खेलों के महत्व पर जोर देते हैं। उदाहरणस्वरूप, भाजपा की सदस्यता अभियान के दौरान उन्होंने कहा कि खेल जैसे अनुशासन से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। आज जब वे स्वास्थ्य मंत्री के रूप में आयुष्मान भारत योजना चला रहे हैं, तो खेलों का यह अनुभव उनके स्वास्थ्य नीतियों में झलकता है। वास्तव में, बचपन की यह खेल यात्रा नड्डा को एक बहुमुखी व्यक्तित्व बनाती है, जो शारीरिक फिटनेस को राजनीतिक ऊर्जा का आधार मानते हैं।
नड्डा के व्यक्तित्व का दूसरा कम चर्चित आयाम उनकी किशोरावस्था की राजनीतिक जागृति है। 1975 में, जब जयप्रकाश नारायण (जे.पी.) का 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन चरम पर था, तो मात्र 15 वर्ष की उम्र में नड्डा सक्रिय हो गए। इंदिरा गांधी सरकार की तानाशाही के खिलाफ चले इस आंदोलन में उन्होंने उपवास में भाग लिया। यह कोई साधारण भागीदारी नहीं थी; यह एक बाल सिपाही की तरह थी, जहां नड्डा ने अपनी स्कूली जिंदगी को दांव पर लगा दिया। आंदोलन के दौरान आपातकाल लगा, और नड्डा जैसे युवा भूमिगत कार्यों में जुट गए।
यह पहलू अनछुआ इसलिए है क्योंकि नड्डा अक्सर अपनी राजनीतिक शुरुआत को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जोड़ते हैं, लेकिन जे.पी. आंदोलन उनकी जड़ें हैं। 1977 से 1990 तक एबीवीपी में रहते हुए उन्होंने विभिन्न पद संभाले, लेकिन जे.पी. का प्रभाव आज भी उनके नेतृत्व शैली में दिखता है – जन-केंद्रित और क्रांतिकारी। आज जब वे भाजपा को 'सेवा ही संगठन' के माध्यम से मजबूत कर रहे हैं, तो यह आंदोलन की भावना ही प्रतीत होती है। यह पहलू नड्डा की शख्सियत को गहराई देता है, जहां राजनीति सेवा का माध्यम बनी।
नड्डा का निजी जीवन उनकी सादगी का प्रतीक है। 11 दिसंबर 1991 को बांग्लाभाषी डॉ. मल्लिका नड्डा से विवाह हुआ, जो एक दंत चिकित्सक हैं। वह उनके दो बेटे हैं – हरीश चंद्र और गिरीश चंद्र। सास जयश्री बनर्जी पूर्व सांसद रहीं। नड्डा दिल्ली के 7-बी, मोतीलाल नेहरू मार्ग पर रहते हैं। राजनीतिक दौड़भाग के बीच परिवार को समय देना उनकी प्राथमिकता है। यह पहलू अनछुआ इसलिए, क्योंकि नड्डा की छवि सार्वजनिक है, लेकिन पारिवारिक गोपनीयता बनाए रखते हैं। यह सादगी उन्हें जमीन से जुड़ा रखती है।
नड्डा की शिक्षा एक और अनदेखा कोण है। पटना विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से एलएलबी की डिग्री हासिल की। लेकिन यह कानूनी पृष्ठभूमि मात्र डिग्री नहीं, बल्कि उनकी सोच का आधार है। हिमाचल लौटने के बाद वे वकील बने, लेकिन 1987 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ 'राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा' अभियान शुरू किया।
यह पहलू अनछुआ इसलिए, क्योंकि नड्डा को हमेशा संगठनकर्ता के रूप में देखा जाता है, न कि कानूनी दिमाग के रूप में। 1993 में बिलासपुर से विधायक चुने जाने के बाद वे स्वास्थ्य एवं संसदीय मामलों के मंत्री बने। 1995 में उन्हें 'बेस्ट लेजिस्लेटर' का पुरस्कार मिला। उनकी कानूनी समझ ने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए (2014-2019) एड्स, टीबी जैसी महामारियों पर नीतियां बनाईं। संयुक्त राष्ट्र में एचआईवी-एड्स पर भाषण देना इसका प्रमाण है। यह आयाम दर्शाता है कि नड्डा की शख्सियत में न्याय और नीति का संतुलन है।
भाजपा अध्यक्ष के रूप में नड्डा का सबसे अनछुआ योगदान कोविड-19 महामारी के दौरान 'सेवा ही संगठन' मिशन है। 2020-21 में उन्होंने 180 मिलियन नए सदस्य जोड़े, लेकिन इससे अधिक प्रभावशाली था 220 मिलियन भोजन किट, 50 मिलियन राशन किट और 56.6 मिलियन मास्क का वितरण। यह पहलू उनकी शख्सियत का मानवतावादी पक्ष उजागर करता है, जो राजनीति से ऊपर उठकर सेवा पर जोर देता है।
Updated on:
02 Dec 2025 10:38 am
Published on:
02 Dec 2025 10:32 am
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