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22 सालों में 30 लाख खुदकुशी: पढ़े-लिखे लोग ज्यादा दे रहे जान, पारिवारिक विवाद सबसे बड़ी वजह

4 फरवरी 2026 को गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में ऑनलाइन गेम की लत सामने आई, जिसके कारण घर में झगड़े हुए। परिवारिक विवाद अब ऑनलाइन गेम की लत से भी जुड़ रहे हैं, जिसे गंभीरता से देखने की जरूरत है।

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भारत

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Vijay Kumar Jha

Feb 04, 2026

प्रतीकात्मक तस्वीर। (फोटो- पत्रिका डिजाइन)

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 4 फरवरी को तीन सगी बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगा कर अपनी जीवन लीला खत्म कर ली। तीनों की उम्र 12, 14 और 16 साल थी। पुलिस इसे ऑनलाइन गेम की लत से जुड़ा मामला बता रही है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच से ऐसा लगता है कि ऑनलाइन गेम की लत के चलते घर में कहासुनी की वजह से बच्चियों ने ऐसा कदम उठाया।

पारिवारिक विवाद आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण रहा है। इन विवादों की वजह अलग-अलग होती है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन गेम या इससे जुड़ी बच्चों की आदतें भी एक वजह बन रही हैं। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। साथ ही, कारणों की लिस्ट में इसे अलग से दर्ज करने की भी जरूरत है।

NCRB Data: 2022 में हुई आत्महत्याओं के कारण

आत्महत्या का कारणप्रतिशत (%)
पारिवारिक समस्याएं31.7%
बीमारी से18.4%
नशाखोरी/लत6.8%
विवाह संबंधी मुद्दे4.8%
प्रेम-प्रसंग4.5%
दिवालियापन एवं ऋणग्रस्तता4.1%
बेरोजगारी1.9%
परीक्षा में असफलता1.2%
प्रियजन की मृत्यु1.2%
व्यावसायिक/कैरियर समस्याएं1.2%
संपत्ति विवाद1.1%
गरीबी0.8%
सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट0.5%
संदिग्ध/अवैध सम्बन्ध0.5%
नपुंसकता/बांझपन0.2%
अज्ञात कारण10.4%
अन्य कारण10.7%

देश में प्रति लाख में 12.4 लोग अपनी जान दे रहे हैं। आत्महत्या गांवों से ज्यादा शहरों में हो रही हैं। एनसीआरबी के मुताबिक शहरों में प्रति लाख लोगों पर आत्महत्या करने वालों की संख्या 16.4 है।

सबसे ज्यादा (31.7 प्रतिशत) आत्महत्या पारिवारिक कारणों से हो रही हैं। अगर शादी से जुड़े कारण भी शामिल कर लिए जाएं तो यह आंकड़ा 36.5 प्रतिशत पर जाता है। यानि, 4.8 प्रतिशत ख़ुदकुशी की घटनाएं शादी-ब्याह से जुड़े कारणों के चलते होती है।

दूसरा सबसे बड़ा कारण बीमारी है। साल 2022 में बीमारी की वजह से आत्महत्या के 18.4 प्रतिशत मामले दर्ज हुए।

इक्कीसवीं शताब्दी के शुरुआती 22 सालों में देश के करीब 30 लाख लोगों (29,87,155) ने खुद से अपनी जान दे दी। इनमें से 15339 को छोड़ कर सभी साठ साल से कम उम्र के थे। तमाम कोशिशों के बावजूद आत्महत्या के मामले कम नहीं हो रहे हैं।

वर्षआत्महत्या करने वाले पुरुष जान देने वाली महिलाएं बाइसेक्सुअल, जिन्होंने की ख़ुदकुशीआत्महत्या के कुल मामले
20006603242561-108593
20016631442192-108506
20026933241085-110417
20037022140630-110851
20047265141046-113697
20057291640998-113914
20067570242410-118112
20077929543342-122637
20088054444473-125017
20098147145680-127151
20108718047419-134599
20118783947746-135585
20128845346992-135445
20139054344256-134799
2014891294252116131666
201591528420887133623
2016889974199714131008
2017890194085216129887
2018921144239111134516
2019976134149317139123
20201085324449822153052
20211189794502628164033
20221227244817228170924

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau - NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2000 से 2022 के बीच छह साल ही ऐसे रहे जब पिछले साल की तुलना में आत्महत्या के कम मामले दर्ज हुए। इन छह सालों में भी ज़्यादातर में आई कमी कोई उल्लेखनीय कमी नहीं काही जा सकती। आंकड़ों का टेबल देख इसे समझा जा सकता है।

आत्महत्या की दर (प्रति एक लाख लोगों में आत्महत्या करने वालों की संख्या) के लिहाज से देखने पर 2022 में सिक्किम टॉप पर था। वहां आत्महत्या दर 43.1 थी। अंडमान निकोबार में भी लगभग इतनी (42.8) ही थी। इसके बाद पुडुचेरी (29.7), केरल (28.5), छतीसगढ़ (28.2) का नाम था। बिहार, मणिपुर, नागालैंड, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप, उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की दर सबसे कम दर्ज की गई।

2022 में कहां कितनी ख़ुदकुशी

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशख़ुदकुशी के मामले
महाराष्ट्र13.3%
तमिलनाडु11.6%
मध्य प्रदेश9.0%
कर्नाटक8.0%
पश्चिम बंगाल7.4%
केरल5.9%
तेलंगाना5.8%
गुजरात5.3%
आंध्र प्रदेश5.2%
छत्तीसगढ़4.9%
उत्तर प्रदेश4.8%
अन्य राज्य / केंद्र शासित प्रदेश18.8%

तीन सालों में इन राज्यों में सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले

क्रम सं202020212022
1महाराष्ट्र (13.0%)महाराष्ट्र (13.5%)महाराष्ट्र (13.3%)
2तमिलनाडु (11.0%)तमिलनाडु (11.5%)तमिलनाडु (11.6%)
3मध्य प्रदेश (9.5%)मध्य प्रदेश (9.1%)मध्य प्रदेश (9.0%)
4पश्चिम बंगाल (8.6%)पश्चिम बंगाल (8.2%)कर्नाटक (8.0%)
5कर्नाटक (8.0%)कर्नाटक (8.0%)पश्चिम बंगाल (7.4%)

आत्महत्या करने वालों में पुरुषों का अनुपात ज्यादा (71.8) रहा। जान देने वाले पुरुषों में 68.2 प्रतिशत शादीशुदा थे, जबकि महिलाओं में 63.0 प्रतिशत शादीशुदा थीं।

एनसीआरबी के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अनपढ़ लोग जान देने जैसा खौफनाक कदम कम उठाते हैं। यह भी दिखता है कि ज्यादा पढे-लिखे लोगों ने आत्महत्या जैसा कदम कम उठाया।

आत्महत्या करने वालों में 11.5 प्रतिशत ही अनपढ़ थे, जबकि 23.9 प्रतिशत मैट्रिक लेवल तक पढे थे। ख़ुदकुशी करने वालों में 18 फीसदी माध्यमिक स्तर तक पढे-लिखे थे और 5.2 प्रतिशत ने ग्रेजुएशन या उससे ज्यादा लेवल की पढ़ाई की थी।

सबसे ज्यादा (58.2%) लोगों ने फांसी लगा कर जान दी। 25.4 फीसदी लोगों ने जहर खाकर जान दी, जबकि 5 फीसदी ने डूब कर और इतने ही लोगों ने चलती गाड़ी/ट्रेन के नीचे आकर ज़िंदगी खत्म कर ली। कई लोगों ने सामूहिक या परिवार के लोगों के साथ ख़ुदकुशी कर ली। ऐसे सबसे ज्यादा (90) मामले तमिलनाडु में दर्ज हुए। राजस्थान में ऐसे 20, आंध्र प्रदेश में 13 और कर्नाटक में 7 मामले हुए।

पढ़ने-खेलने-कमाने की उम्र में दे देते हैं जान: 2022 में किस उम्र के कितने लोगों ने की आत्महत्या

आयु वर्गपुरुषमहिलाउभयलिंगी
18 वर्ष से कम4,6165,5881
18 वर्ष से अधिक - 30 वर्ष से कम38,25920,82821
30 वर्ष से अधिक - 45 वर्ष से कम42,02912,3175
45 वर्ष से अधिक - 60 वर्ष से कम26,1085,8121
60 वर्ष से अधिक11,7123,6270