
प्रतीकात्मक तस्वीर। (फोटो- पत्रिका डिजाइन)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 4 फरवरी को तीन सगी बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगा कर अपनी जीवन लीला खत्म कर ली। तीनों की उम्र 12, 14 और 16 साल थी। पुलिस इसे ऑनलाइन गेम की लत से जुड़ा मामला बता रही है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच से ऐसा लगता है कि ऑनलाइन गेम की लत के चलते घर में कहासुनी की वजह से बच्चियों ने ऐसा कदम उठाया।
पारिवारिक विवाद आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण रहा है। इन विवादों की वजह अलग-अलग होती है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन गेम या इससे जुड़ी बच्चों की आदतें भी एक वजह बन रही हैं। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। साथ ही, कारणों की लिस्ट में इसे अलग से दर्ज करने की भी जरूरत है।
| आत्महत्या का कारण | प्रतिशत (%) |
| पारिवारिक समस्याएं | 31.7% |
| बीमारी से | 18.4% |
| नशाखोरी/लत | 6.8% |
| विवाह संबंधी मुद्दे | 4.8% |
| प्रेम-प्रसंग | 4.5% |
| दिवालियापन एवं ऋणग्रस्तता | 4.1% |
| बेरोजगारी | 1.9% |
| परीक्षा में असफलता | 1.2% |
| प्रियजन की मृत्यु | 1.2% |
| व्यावसायिक/कैरियर समस्याएं | 1.2% |
| संपत्ति विवाद | 1.1% |
| गरीबी | 0.8% |
| सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट | 0.5% |
| संदिग्ध/अवैध सम्बन्ध | 0.5% |
| नपुंसकता/बांझपन | 0.2% |
| अज्ञात कारण | 10.4% |
| अन्य कारण | 10.7% |
देश में प्रति लाख में 12.4 लोग अपनी जान दे रहे हैं। आत्महत्या गांवों से ज्यादा शहरों में हो रही हैं। एनसीआरबी के मुताबिक शहरों में प्रति लाख लोगों पर आत्महत्या करने वालों की संख्या 16.4 है।
सबसे ज्यादा (31.7 प्रतिशत) आत्महत्या पारिवारिक कारणों से हो रही हैं। अगर शादी से जुड़े कारण भी शामिल कर लिए जाएं तो यह आंकड़ा 36.5 प्रतिशत पर जाता है। यानि, 4.8 प्रतिशत ख़ुदकुशी की घटनाएं शादी-ब्याह से जुड़े कारणों के चलते होती है।
दूसरा सबसे बड़ा कारण बीमारी है। साल 2022 में बीमारी की वजह से आत्महत्या के 18.4 प्रतिशत मामले दर्ज हुए।
इक्कीसवीं शताब्दी के शुरुआती 22 सालों में देश के करीब 30 लाख लोगों (29,87,155) ने खुद से अपनी जान दे दी। इनमें से 15339 को छोड़ कर सभी साठ साल से कम उम्र के थे। तमाम कोशिशों के बावजूद आत्महत्या के मामले कम नहीं हो रहे हैं।
| वर्ष | आत्महत्या करने वाले पुरुष | जान देने वाली महिलाएं | बाइसेक्सुअल, जिन्होंने की ख़ुदकुशी | आत्महत्या के कुल मामले |
| 2000 | 66032 | 42561 | - | 108593 |
| 2001 | 66314 | 42192 | - | 108506 |
| 2002 | 69332 | 41085 | - | 110417 |
| 2003 | 70221 | 40630 | - | 110851 |
| 2004 | 72651 | 41046 | - | 113697 |
| 2005 | 72916 | 40998 | - | 113914 |
| 2006 | 75702 | 42410 | - | 118112 |
| 2007 | 79295 | 43342 | - | 122637 |
| 2008 | 80544 | 44473 | - | 125017 |
| 2009 | 81471 | 45680 | - | 127151 |
| 2010 | 87180 | 47419 | - | 134599 |
| 2011 | 87839 | 47746 | - | 135585 |
| 2012 | 88453 | 46992 | - | 135445 |
| 2013 | 90543 | 44256 | - | 134799 |
| 2014 | 89129 | 42521 | 16 | 131666 |
| 2015 | 91528 | 42088 | 7 | 133623 |
| 2016 | 88997 | 41997 | 14 | 131008 |
| 2017 | 89019 | 40852 | 16 | 129887 |
| 2018 | 92114 | 42391 | 11 | 134516 |
| 2019 | 97613 | 41493 | 17 | 139123 |
| 2020 | 108532 | 44498 | 22 | 153052 |
| 2021 | 118979 | 45026 | 28 | 164033 |
| 2022 | 122724 | 48172 | 28 | 170924 |
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau - NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2000 से 2022 के बीच छह साल ही ऐसे रहे जब पिछले साल की तुलना में आत्महत्या के कम मामले दर्ज हुए। इन छह सालों में भी ज़्यादातर में आई कमी कोई उल्लेखनीय कमी नहीं काही जा सकती। आंकड़ों का टेबल देख इसे समझा जा सकता है।
आत्महत्या की दर (प्रति एक लाख लोगों में आत्महत्या करने वालों की संख्या) के लिहाज से देखने पर 2022 में सिक्किम टॉप पर था। वहां आत्महत्या दर 43.1 थी। अंडमान निकोबार में भी लगभग इतनी (42.8) ही थी। इसके बाद पुडुचेरी (29.7), केरल (28.5), छतीसगढ़ (28.2) का नाम था। बिहार, मणिपुर, नागालैंड, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप, उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की दर सबसे कम दर्ज की गई।
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | ख़ुदकुशी के मामले |
| महाराष्ट्र | 13.3% |
| तमिलनाडु | 11.6% |
| मध्य प्रदेश | 9.0% |
| कर्नाटक | 8.0% |
| पश्चिम बंगाल | 7.4% |
| केरल | 5.9% |
| तेलंगाना | 5.8% |
| गुजरात | 5.3% |
| आंध्र प्रदेश | 5.2% |
| छत्तीसगढ़ | 4.9% |
| उत्तर प्रदेश | 4.8% |
| अन्य राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | 18.8% |
| क्रम सं | 2020 | 2021 | 2022 |
| 1 | महाराष्ट्र (13.0%) | महाराष्ट्र (13.5%) | महाराष्ट्र (13.3%) |
| 2 | तमिलनाडु (11.0%) | तमिलनाडु (11.5%) | तमिलनाडु (11.6%) |
| 3 | मध्य प्रदेश (9.5%) | मध्य प्रदेश (9.1%) | मध्य प्रदेश (9.0%) |
| 4 | पश्चिम बंगाल (8.6%) | पश्चिम बंगाल (8.2%) | कर्नाटक (8.0%) |
| 5 | कर्नाटक (8.0%) | कर्नाटक (8.0%) | पश्चिम बंगाल (7.4%) |
आत्महत्या करने वालों में पुरुषों का अनुपात ज्यादा (71.8) रहा। जान देने वाले पुरुषों में 68.2 प्रतिशत शादीशुदा थे, जबकि महिलाओं में 63.0 प्रतिशत शादीशुदा थीं।
एनसीआरबी के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अनपढ़ लोग जान देने जैसा खौफनाक कदम कम उठाते हैं। यह भी दिखता है कि ज्यादा पढे-लिखे लोगों ने आत्महत्या जैसा कदम कम उठाया।
आत्महत्या करने वालों में 11.5 प्रतिशत ही अनपढ़ थे, जबकि 23.9 प्रतिशत मैट्रिक लेवल तक पढे थे। ख़ुदकुशी करने वालों में 18 फीसदी माध्यमिक स्तर तक पढे-लिखे थे और 5.2 प्रतिशत ने ग्रेजुएशन या उससे ज्यादा लेवल की पढ़ाई की थी।
सबसे ज्यादा (58.2%) लोगों ने फांसी लगा कर जान दी। 25.4 फीसदी लोगों ने जहर खाकर जान दी, जबकि 5 फीसदी ने डूब कर और इतने ही लोगों ने चलती गाड़ी/ट्रेन के नीचे आकर ज़िंदगी खत्म कर ली। कई लोगों ने सामूहिक या परिवार के लोगों के साथ ख़ुदकुशी कर ली। ऐसे सबसे ज्यादा (90) मामले तमिलनाडु में दर्ज हुए। राजस्थान में ऐसे 20, आंध्र प्रदेश में 13 और कर्नाटक में 7 मामले हुए।
| आयु वर्ग | पुरुष | महिला | उभयलिंगी |
| 18 वर्ष से कम | 4,616 | 5,588 | 1 |
| 18 वर्ष से अधिक - 30 वर्ष से कम | 38,259 | 20,828 | 21 |
| 30 वर्ष से अधिक - 45 वर्ष से कम | 42,029 | 12,317 | 5 |
| 45 वर्ष से अधिक - 60 वर्ष से कम | 26,108 | 5,812 | 1 |
| 60 वर्ष से अधिक | 11,712 | 3,627 | 0 |
Updated on:
04 Feb 2026 04:36 pm
Published on:
04 Feb 2026 04:35 pm
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