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महज 960 महिलाएं IPS अधिकारी, पुलिस विभाग और न्यायपालिका में क्या है स्थिति? इस रिपोर्ट में हुआ खुलासा

India Justice Report 2025: इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2025 के मुताबिक देश में पुलिस विभाग में महिला अधिकारियों की भारी कमी है। देश में केवल 960 महिलाएं ही आईपीएस अधिकारी हैं।

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भारत

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Ashib Khan

Apr 15, 2025

File Photo

India Justice Report 2025: इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2025 नामक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में पुलिस विभाग में महिला अधिकारियों की भारी कमी है। रिपोर्ट में बताया गया है वर्तमान समय में देश में केवल 960 महिलाएं ही आईपीएस अधिकारी हैं। इसके अलावा 24,322 गैर-आईपीएस, 1003 डिप्टी एसपी और 2.17 लाख से अधिक महिलाएं कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल पद पर तैनात है। रिपोर्ट के मुताबिक 89 प्रतिशत महिलाएं सबसे निचले स्तर पर काम कर रही है जबकि 08 प्रतिशत महिलाएं ही अधिकारी पद पर हैं।

2.42 लाख महिला पुलिसकर्मी

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2025 के मुताबिक पुलिस विभाग में पुरुष अधिकारियों की तुलना में महिला अधिकारियों की संख्या कम है। देश में 20.3 लाख कुल पुलिसकर्मियों की संख्या है। इनमें से केवल 2.42 लाख महिला पुलिसकर्मी हैं। रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्तर पर 28 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा कांस्टेबल स्तर पर 21 प्रतिशत पद खाली है। 

कर्नाटक पहले नंबर पर

रिपोर्ट में न्याय व्यवस्था के चारों स्तंभ पुलिस, न्यायपालिका, जेल और कानूनी सहायता जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में कर्नाटक दूसरी बार कर्नाटक पहले नंबर पर है, जबकि आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर पर है। इसके अलावा तेलंगाना तीसरे, चौथे नंबर पर केरल और पांचवें नंबर पर तमिलनाडु है। 

रिपोर्ट में न्यायपालिका की स्थिति पर क्या कहा

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2025 की रिपोर्ट में न्यायपालिका की स्थिति पर कहा कि 140 करोड़ की जनसंख्या के लिए केवल 21,285 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जो कि औसतन प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 15 जज बैठते हैं, जबकि 1987 के लॉ कमीशन की सिफारिश पर प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 50 न्यायाधीश सुझाए गए थे।

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उच्च न्यायालयों में कितने पद खाली

रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में हाई कोर्ट और जिला कोर्ट में पद खाली है। हाई कोर्ट में 33 प्रतिशत और जिला कोर्ट में 21 प्रतिशत पद खाली है। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय में महिला न्यायाधीश की संख्या कुल जजों की तुलना में महज 6 प्रतिशत ही है। वहीं उच्च न्यायालयों में 14 प्रतिशत और जिला अदालतों में 38 प्रतिशत महिला जज हैं।