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GM Mustard: भारत पर जेनेटिकली मोडिफायड (जीएम) बीजों के उपयोग को अनुमति देने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। जीएम कॉटन के बाद अब जीएम सरसों की खेती शुरू करने के मुद्दे पर देश के वैज्ञानिक बंटे हुए दिख रहे हैं। जीएम सरसों कितना फायदेमंद या नुकसानदायक है, इसके परीक्षण की पर्यावरणीय अनुमति देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। दुनिया में अकेला भारत नहीं बल्कि अनेक देशों में देशज फसलें और बीज बचाने की जंग लड़ी जा रही है। जापान ने जीएम खाद्यान्नों को भले ही सीमित अनुमति दी है लेकिन फसलों के उत्पादन पर रोक लगाई है। दिलचस्प तथ्य यह है कि गरीबी और भुखमरी के सबसे ज्यादा शिकार अफ्रीका महाद्वीप के अनेक देश मजबूती से इसका विरोध कर रहे हैं।
जीएम बीज बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरफदारी करने वाला विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) दुनिया के पिछड़े और विकासशील देशों को खाद्यान्न सुरक्षा के नाम पर जीएम फसल उगाने का दबाव बना रहा है, जिसका दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दुनिया के सजग देशों ने क्या रवैया अपनाया है। कई देशों ने अपनी जैव विविधता की रक्षा और पारंपरिक कृषि प्रणालियों को बचाने के लिए बाहरी बीजों, विशेष रूप जीएम बीजों पर प्रतिबंध या नियंत्रण लागू किया है।
भारत और जापान की रणनीति में फर्क
भारत की तरह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में जापान एक ऐसा देश है जो अपनी पारंपरिक खेती और आहार प्रणाली को लेकर काफी सजग है। इसके लिए जापान ने कड़े नियम बना रखे हैं। एक नजर में समझें दोनों देशों ने जीएम फसलों को किस तरह का रवैया अपनाया है।
1- बीजों पर नियंत्रण/संरक्षण
2- जीएम फसलों पर नीति
3-पारंपरिक बीजों की रक्षा
4- जैव विविधता संरक्षण
5- किसानों की स्थिति
Published on:
15 Apr 2025 07:34 pm
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