
विदेशों से भारत लाए जा रहे हैं भगोड़े (Representational Photo)
विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे भगोड़े अपराधियों की तलाश और वापसी के लिए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ (Operation Trishul) के तहत तकनीक आधारित अभियान तेज़ किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के निर्देशन में सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट, जियो-लोकेशन, निगरानी, प्रोफाइल मैपिंग और इंटरपोल के सहयोग से भगोड़ों का पता लगाया जा रहा है।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का भी इस्तेमाल हो रहा है। 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत लाया गया जो किसी ने किसी अपराध में लिप्त थे। इनमें हत्या/हिंसक अपराध के 62, यौन अपराध के 53, संगठित अपराध के 42, अन्य मामलों के 45, मानव तस्करी के 18, आतंकवाद के 17, एनडीपीएस के 16, तस्करी/साइबर के 12 और वित्तीय अपराध के 9 आरोपी हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2019 में 9, 2020 में 7, 2021 में 23, 2022 में 40, 2023 में 37, 2024 में 43, 2025 में सर्वाधिक 70 और 2026 में जुलाई तक 45 भगोड़े भारत लाए गए हैं। सरकार ने भगोड़ों को वापस लाना राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है।
ऑपरेशन त्रिशूल के तहत विदेशों में छिपे भगोड़ों की पहचान और लोकेशन ट्रैकिंग के लिए सैटेलाइट, डिजिटल फुटप्रिंट, जियो-लोकेशन, निगरानी और प्रोफाइल मैपिंग का इस्तेमाल हो रहा है। इंटरपोल से मिली सूचनाओं को तकनीकी निगरानी से जोड़ा जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालतों की कार्यवाही कर प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज की जा रही है। खालिस्तान समर्थक नेटवर्क, गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़, नार्को-टेरर, साइबर अपराध और फर्जी मुद्रा से जुड़े मामलों पर भी कार्रवाई हुई है।
2019-2026 में पीएमएलए के तहत भगोड़े अपराधियों की इतनी 17,874 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त की गई, जबकि 18,762 करोड़ रुपए की संपत्ति और धन की रिकवरी हुई। जनवरी 2025 में शुरू पोर्टल से राज्य और केंद्र की 1,400 से ज़्यादा एजेंसियाँ इंटरपोल नेटवर्क से जुड़ीं। सूचना साझा करने का समय कई मामलों में 3-10 दिन हुआ, पहले 10-20 दिन या अधिक लगता था। रेड कॉर्नर नोटिस में तेज़ी देखने को मिली है।
Updated on:
05 Aug 2026 04:37 am
Published on:
05 Aug 2026 04:37 am
