
लोकसभा चुनाव का ऐलान अब कभी भी हो सकता है। चुनाव में जाने के लिए भारतीय जनता पार्टी जहां अपनी पूरी ताकट से जुट गई है। वहीं, INDIA गठबंधन समेत पूरा विपक्ष अभी भी सीट बंटवारें को लेकर आपस में उलझा हुआ है। बता दें कि चुनाव के ऐलान से पहले ही विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर लाने वाले नीतीश कुमार फिर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल एनडीए में शामिल हो गई।
वहीं, अब खबर है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन AIMIM यूपी के मुस्लिम बाहुल मुरादाराबाद, रामपुर, संभल, बरेली में उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा बिहार के सीमांचल में भी ओवैसी की पार्टी फिर से कैंडिडेट उतारने वाली है। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में AIMIM के टिकट पर 5 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।
ओवैसी के फैसले से INDIA गठबंधन को लगेगा झटका
ऐसा पहली बार नहीं होगी की ओवैसी इन जिलों में अपना प्रत्याशी उतारेंगे। इससे पहले के चुनाव में भी वो प्रत्याशी उतार चुके हैं। बता दें कि INDIA अलायंस को मुस्लिम वोटरों पर भरोसा है कि वो भाजपा को हराने के लिए उनका साथ देंगे। लेकिन ओवैसी की रणनीति से उसे तगड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार ओवैसी की पार्टी उत्तर प्रदेश में करीब 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इनमें पश्चिम यूपी, रुहेलखंड और पूर्वांचल की सीटें ज्यादा होंगी। इसके बाद बिहार की भी 7 सीटों पर AIMIM की नजर है। बिहार में 2019 में ओवैसी की पार्टी ने महज एक सीट पर ही चुनाव लड़ा था। यही नहीं महाराष्ट्र के औरंगाबाद की एक सीट पिछली बार जीतने वाले ओवैसी अब इस राज्य में भी अपनी पैठ बढ़ाने की तैयारी में हैं।
बंगाल में उम्मीदवार नहीं उतारेगी AIMIM
सूत्र बताते है कि AIMIM मुंबई और मराठवाड़ा की सीट पर भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है। इसके अलावा तेलंगाना में हैदराबाद के बाहर भी विस्तार की योजना है। चर्चा है कि पड़ोस की ही सिकंदराबाद सीट से भी कैंडिडेट उतारा जा सकता है। हालांकि ममता बनर्जी के लिए थोड़ी राहत की बात होगी। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी चुनाव में नहीं उतरेगी। वहीं, बिहार के सीमांचल इलाके में ओवैसी की पार्टी अपने लिए बड़ा जनाधार देखती रही है। 2019 में हैदराबाद से ओवैसी जीते थे और महाराष्ट्र के औरंगाबाद से इम्तियाज जलील संसद पहुंचे थे।
AIMIM की एंट्री से लालू-अखिलेश को सबसे ज्यादा नुकसान
2019 के लोकसभा चुनाव में किशनगंज सीट इकलौती सीट थी, जहां से INDIA अलायंस को जीत मिली थी। इसके बावजूद AIMIM के कैंडिडेट अख्तर-उल-इमान को यहां 3 लाख से ज्यादा वोट मिला था और वह तीसरे नंबर पर रहे थे। ऐसे में यहां से फिर AIMIM का उतरना चिंता की बात होगी। दरअसल उत्तर भारत में समाजवादी पार्टी, आरजेडी और कांग्रेस जैसे दल मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर रहे हैं। ऐसे में यहां ओवैसी की एंट्री उनके कई समीकरणों को बिगाड़ सकता है और इसका सीधा फायदा भाजपा को सीटों के तौर पर होगा।
Updated on:
07 Mar 2024 04:28 pm
Published on:
07 Mar 2024 04:13 pm
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