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सूनी वादियों में उस ‘खून से सनी तस्वीर’ का खौफ अब भी कायम, लोगों का सवाल- सब ठीक तो ‘नो एंट्री’ क्यों?

पहलगाम में डर के कारण पर्यटक करीब 40% कम हो गए हैं। हनीमून कपल्स भी नहीं आ रहे। ऑपरेशन महादेव सफल रहा, लेकिन लोग अब भी रात रुकने से बच रहे हैं।

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Pahalgam Tourism

कश्मीर की खूबसूरत वादियों में शामिल पहलगाम फाइल फोटो-पत्रिका

Pahalgam Tourism: कश्मीर की खूबसूरत वादियों में शामिल पहलगाम, जो नवविवाहित जोड़ों की पसंदीदा जगह माना जाता है, इन दिनों काफी सूना नजर आ रहा है। यहां पहले की तरह सैलानियों की भीड़ नहीं दिख रही और खासकर हनीमून मनाने आने वाले कपल्स लगभग गायब हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले 10 से 12 दिनों में पर्यटकों की संख्या में करीब 40 फीसदी तक कमी आई है। उनका कहना है कि घाटी में हुई हाल की घटनाओं और उनकी तस्वीरों का लोगों के मन पर असर पड़ा है, जिससे वे यहां आने से बच रहे हैं। फिलहाल पहलगाम की वादियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और सैलानी फिर लौटेंगे।

सफल रहा ऑपरेशन महादेव

पिछले साल बैसरन घाटी में हुई एक दर्दनाक घटना ने पर्यटकों के मन पर गहरा असर डाला है। एक दुल्हन की अपने पति का शव गोद में लिए बैठी तस्वीर ने लोगों को झकझोर दिया था। इसी मनोवैज्ञानिक असर के कारण इस साल घाटी में पर्यटकों की संख्या में करीब 40 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। हालांकि, आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों का ‘ऑपरेशन महादेव’ सफल रहा है। हमले में शामिल आतंकियों का सफाया किया जा चुका है। इसके बावजूद डर का माहौल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जिससे सैलानी यहां आने से हिचक रहे हैं।

'नाइट स्टे' से कतरा रहे सैलानी

खौफ का असर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी पड़ा है। श्रीनगर से पहलगाम आने वाले पर्यटक भी शाम से पहले लौटना सुरक्षित
जाना सुरक्षित समझते हैं। होटलों की खाली लॉबियां गवाही दे रही हैं कि भरोसा बहाल नहीं हुआ है। पहलगाम में रेस्टोरेंट संचालक नरेंद्र सिंह ने कहा भीड़ पहले के मुकाबले काफी कम है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं- पहला, मौजूदा ग्लोबल टेंशन और दूसरा, पहलगाम हमले के एक साल पूरे होने पर अनहोनी का डर।' वह कहते हैं, हमें उम्मीद है कि मई से स्थिति में सुधार होगा। स्कूलों में छुट्टियां पड़ेंगी, तो लोग एक बार फिर घाटी पहुंचेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद का चेहरा….

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया। यह ऑपरेशन न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति का प्रतीक बना, बल्कि एक साल बाद भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारियों को पूरी तरह नई ऊंचाई पर ले गया है।

  • ऑपरेशन के तुरंत बाद भारतीय सेना ने सैकड़ों नए ड्रोन खरीदे। इनमें कामिकेज और एफपीवी ड्रोन शामिल हैं। इससे सेना की लड़ाकू क्षमता कई गुना बढ़ गई।
  • सेना में नई फोर्स मल्टीप्लायर्स बनाने का फोर्स मही प्लायर्सद ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी, भैरव बटालियन, स्पेशलाइज्ड ड्रोन यूनिट्स शामिल मेल हैं। हैं।
  • सीमा क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी और सैनिकों के रहने की सुविधाओं में सुधार किया। इससे सेना को और तेज, स्मार्ट और तैयार बनाया गया।
  • ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय थल सेना भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला।

अब भारतीय सशस्त्र बल भविष्य की किसी भी लड़ाई में पूर्ण रूप से संयुक्त होकर काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा की। इसका मकसद दुश्मन की घुसपैठ को रोकना और भारत की आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाना है। इस मिशन के तहत 2035 तक पूरे देश में सुरक्षा कवच फैलाया जाएगा।