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पश्चिम बंगाल: 300 करोड़ का चना दाल घोटाला, RTI में खुलासा, 14,000 टन दाल गायब, निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

दार्जिलिंग में चना दाल वितरण स्कीम में 300 करोड रुपये की कथित गडबडी का मामला सामने आया है। IGJF के आरोपों से GTA पर दबाव बढा है और चुनाव से पहले यह बडा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

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भारत

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Ankit Sai

Apr 21, 2026

पश्चिम बंगाल में 300 करोड़ का चना दाल घोटाला

पश्चिम बंगाल में 300 करोड़ का चना दाल घोटाला

West Bengal: दार्जिलिंग की पहाडियां इन दिनों राजनीतिक हलचल का केंद्र बनी हुई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले यहां एक बडे घोटाले का मुद्दा सामने आया है। चना दाल बांटने वाली सरकारी योजना में करीब 300 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगा है, जिससे गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) विवाद में आ गया है।

RTI में 14 हजार टन चना दाल गायब

यह विवाद तब शुरू हुआ जब इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट (IGJF) ने सार्वजनिक रूप से GTA पर आरोप लगाए। पार्टी के नेता फिन्जो वांगयाल गुरंग ने प्रेस ब्रीफिंग में आरटीआई दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत भेजी गई लगभग 14,000 मीट्रिक टन चना दाल का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है। उन्होंने कहा 'अब जवाब देने की जिम्मेदारी GTA पर है 'जो सीधे प्रशासन को चुनौती देता बयान माना जा रहा है। इस मुद्दे ने पहाडी क्षेत्रों में राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।

सरकारी योजना में निजी कंपनी की एंट्री

यह पूरा मामला भारत ब्रांड प्रोग्राम से जुडा है, जिसे 2023 में शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य महंगाई से राहत देने के लिए चना दाल जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों को सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराना था। यह योजना राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) जैसी एजेंसियों के माध्यम से लागू की जाती है। लेकिन इस मामले में सबसे बडा सवाल वितरण प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है, जहां सरकारी कोऑपरेटिव की बजाय एक निजी फर्म को शामिल किया गया। विपक्ष का कहना है कि इस बदलाव ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खडे कर दिए हैं।

चुनाव से पहले खुलासा, सियासत गरमाई

यह खुलासा ठीक चुनाव से पहले ही किया गया। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में दार्जिलिंग समेत पूरा उत्तर बंगाल वोट डालने जा रहा है। ऐसे में IGJF द्वारा इस मुद्दे को उठाना चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं GTA की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे संदेह और गहरा गया है। यह मामला आने वाले दिनों में चुनावी मुद्दा बन सकता है और इसका सीधा असर मतदान पर भी पड सकता है।