ईरान को एक बड़ा रणनीतिक सबक दिया है। अब वह परमाणु हथियारों के बजाय होर्मुज पर अपने नियंत्रण को ही मुख्य ताकत के रूप में देख रहा है। ईरान का मानना है कि जलडमरूमध्य पर उसका भौगोलिक अधिकार उसे वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाता है। उसने संकेत दिया है कि वह भविष्य में इस मार्ग पर शुल्क भी लगा सकता है, जिससे उसे हर महीने अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और अन्य खाड़ी देशों ने इस पर चिंता जताई है और कहा है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सभी के लिए खुले रहने चाहिए। इसके बावजूद ईरान अपने रुख पर कायम है और इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है।