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खून से सना पोलियो अभियान: पाकिस्तान में आतंकियों ने बच्चों के रक्षकों को सरेआम गोलियों से उड़ाया!

Pakistan Polio Team Attack:पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो उन्मूलन अभियान के पहले ही दिन आतंकवादियों ने सुरक्षा में तैनात दो जांबाज पुलिसकर्मियों की गोली मार कर बेरहमी से हत्या कर दी।

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भारत

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MI Zahir

May 19, 2026

Polio team killed in Pakistan

पाकिस्तान में पोलियो टीम की हत्या। ( फोटो: IANS )

Pakistan Polio Drive Crisis: पाकिस्तान में बच्चों को अपंगता से बचाने के लिए शुरू हुआ पाकिस्तान पोलियो अभियान संकट एक बार फिर बंदूक की नोक पर आ गया है। उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील इलाके खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां आतंककारियों ने दो अलग-अलग हमलों में उन पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया, जो मासूम बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाली टीमों की सुरक्षा कर रहे थे। घात लगाकर किए गए इन हमलों में दोनों पुलिस अधिकारियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में खौफ का माहौल है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि वे इन धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

डरावनी साजिश: ड्यूटी से लौटते समय बनाया निशाना

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह वारदात सोमवार को बाजौर जिले के सालारजई तहसील में हुई। उस समय सूबे में चार दिवसीय विशेष पोलियोरोधी टीकाकरण अभियान का पहला दिन था। पहला हमला तब हुआ जब 35 वर्षीय कांस्टेबल सैयद अजीज पोलियो टीम को सुरक्षा देने के बाद अपने घर लौट रहे थे। घात लगाए बैठे एके-47 से लैस बंदूकधारियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के महज दो घंटे बाद उसी इलाके में दूसरे कांस्टेबल सैयद कादर शाह को भी इसी तरह निशाना बनाया गया। वे भी अपनी ड्यूटी खत्म कर घर जा रहे थे। गंभीर रूप से घायल कादर शाह ने जिला मुख्यालय अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

साजिश के पीछे किसका हाथ ?

इस हमले की जिम्मेदारी तत्काल किसी भी आतंकी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का सीधा शक प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और स्थानीय चरमपंथी गुटों पर है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी और आतंकी गुट लंबे समय से पोलियो वैक्सीन को लेकर अजीबोगरीब अफवाहें फैलाते रहे हैं। उनका दावा है कि यह बच्चों को बांझ बनाने की एक 'पश्चिमी साजिश' है। इसी जाहिलाना सोच के कारण 1990 के दशक से लेकर अब तक पाकिस्तान में 200 से अधिक पोलियो कार्यकर्ताओं और उनकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की हत्या की जा चुकी है।

वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की बदनामी

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में पाकिस्तान और उसका पड़ोसी देश अफगानिस्तान ही केवल ऐसे दो मुल्क बचे हुए हैं, जहां से पोलियो का पूरी तरह खात्मा नहीं हो सका है। पाकिस्तान सरकार ने इस बार करीब 19 मिलियन (1.9 करोड़) बच्चों को ड्रॉप्स पिलाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 1 लाख 63 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों को मैदान में उतारा गया है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों पर हो रहे ये लगातार हमले सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं।

प्रांतीय पुलिस महानिरीक्षक से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब की

इस कायरता भरे हमले पर पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी ने तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, 'यह देश के मासूम बच्चों के भविष्य की रक्षा करने वाले जांबाज जवानों पर एक कायरतापूर्ण हमला है। हमारे पुलिसकर्मियों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम आतंककारियों की इस घटिया सोच को पूरी तरह कुचल कर रहेंगे।' वहीं खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल आफरीदी ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रांतीय पुलिस महानिरीक्षक से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात कर दिया

ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, सालारजई और उसके आस-पास के सीमावर्ती इलाकों में भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रवक्ता इसरार खान ने बताया कि हमलावरों को पकड़ने के लिए पूरे बाजौर जिले की नाकाबंदी कर बड़े पैमाने पर 'कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन' (घेराबंदी और तलाशी अभियान) चलाया जा रहा है। हालांकि, इतने बड़े तनाव के बावजूद प्रशासन ने साफ किया है कि पोलियो टीकाकरण अभियान को रोका नहीं जाएगा और यह अपने तय शेड्यूल के अनुसार जारी रहेगा।

महिला स्वास्थ्यकर्मियों में भारी डर का माहौल

इस घटना का दूसरा पहलू उन महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मानसिक स्थिति से जुड़ा हुआ है, जो अपनी जान जोखिम में डाल कर घर-घर जाकर दवा पिलाती हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस हमले के बाद महिला स्वास्थ्यकर्मियों में भारी डर का माहौल है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब उनके रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे गलियों और मोहल्लों में कैसे सुरक्षित रह सकती हैं। यदि उन्हें अतिरिक्त और पुख्ता सुरक्षा नहीं दी गई, तो आने वाले दिनों में वे इस अभियान का बहिष्कार करने पर मजबूर हो सकती हैं, जो पाकिस्तान के स्वास्थ्य ढांचे के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। ( इनपुट: IANS)