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पाकिस्तान की हालत बदतर…ब्रिटेन में भारतीय छात्र और कुशल कामगार वीजा एक्सटेंशन पाने में सबसे आगे

Indian Students UK VISA: ब्रिटेन में वीजा एक्सटेंशन पाने में भारतीय छात्र और कुशल कामगार अब भी जा एक्सटेंशन पाने वालों में सबसे आगे हैं। 2025 में भारतीयों को यूके के 95,231 स्टडी वीजा मिले, जबकि… हेल्थकेयर में भी भारतीय अग्रणी

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 28, 2026

Indian students UK visa

ब्रिटेन में वीजा एक्सटेंशन पाने में भारतीय छात्र और कुशल कामगार सबसे आगे (इमेज सोर्स: चैट GPT AI जनरेटेड इमेज)

नई दिल्ली. ब्रिटेन में भारतीय छात्र और कुशल कामगार अब भी वीजा एक्सटेंशन पाने वालों में सबसे आगे हैं। खासतौर पर पढ़ाई और हेल्थकेयर सेक्टर में भारतीयों की संख्या यहां सबसे ज्यादा रही है। दिसंबर 2025 में ब्रिटेन ने भारतीयों को 95,231 स्पॉन्सर्ड स्टडी वीजा दिए। यह कुल जारी किए गए स्टडी वीजा का 23% है। हेल्थ और केयर सेक्टर में भी भारतीयों को सबसे ज्यादा वीजा एक्सटेंशन (1,04,555) मिले।

इसके अलावा स्किल्ड वर्कर वीजा एक्सटेंशन (90031 वीजा) में भी भारतीय सबसे आगे रहे। यूके होम ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ग्रेजुएट रूट एक्सटेंशन में भी भारतीयों को सबसे ज्यादा 90,153 वीजा एक्सटेंशन दिए गए।

ग्रेजुएट रूट वीजा क्या है?

ग्रेजुएट रूट वीजा उन विदेशी छात्रों के लिए है जो ब्रिटेन से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। ऐसे छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां दो साल तक काम कर सकते हैं या नौकरी की तलाश कर सकते हैं। हालांकि, ग्रेजुएट रूट के वीजा एक्सटेंशन में साल 2025 में 6% की कमी आई।

इन क्षेत्रों में एक्सटेंशन वीजा पाने में भारतीय आगे

हेल्थ एंड केयर वर्कर एक्सटेंशन

देशसंख्या
भारत1,04,555
नाइजीरिया88,461
जिम्बाब्वे28,914
हेल्थ एंड केयर वर्कर एक्सटेंशन

स्किल्ड वर्कर एक्सटेंशन

देशसंख्या
भारत90,031
पाकिस्तान16,098
नाइजीरिया12,485
स्किल्ड वर्कर एक्सटेंशन

ग्रेजुएट एक्सटेंशन

देशसंख्या
भारत90,153
नाइजीरिया42,220
पाकिस्तान30,464 मात्र...
ग्रेजुएट एक्सटेंशन

प्रवासी पेशेवरों की संख्या में गिरावट

ब्रिटेन की संस्था वर्क राइट्स सेंटर (डब्ल्यूआरसी) ने चेतावनी दी है कि अब पहले की तुलना में कम प्रवासी केयर वर्कर, नर्स, थेरेपिस्ट, वैज्ञानिक, टीचर और स्किल्ड वर्कर काम करने के लिए ब्रिटेन आ रहे हैं। विदेशी नर्सों की संख्या में 93% की गिरावट आई है। ये आंकड़े सरकार की माइग्रेशन कम करने की नीति पर सवाल उठाते हैं।