
मानसून सत्र की कार्रवाई के दौरान लोकसभा (फोटो - आईएएनएस)
Delimitation Bill 2026 and Parliament Special Session: केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होने के बाद भी संसद का सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा। इसका मकसद जरूरत पड़ने पर कम समय में विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रखना है।
बताया जा रहा है कि सरकार दोनों सदनों में संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है। अगर पर्याप्त समर्थन मिल जाता है तो 16, 17 और 18 अगस्त को तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सामने भी विशेष सत्र का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने संकेत दिया है कि वह 16 अगस्त से परिसीमन विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाना चाहती है। कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर कहा है कि वह पहले पार्टी और अन्य विपक्षी दलों से चर्चा करेगी उसके बाद अपना रुख स्पष्ट करेगी।
पिछले संसदीय सत्र में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए थे। इनका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के साथ-साथ देश में नए सिरे से परिसीमन कराना है। इन्हीं में से एक परिसीमन विधेयक-2026 है।
इस विधेयक के तहत एक नया परिसीमन आयोग गठित किया जाएगा। यह आयोग देश की नवीनतम जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय करेगा और राज्यों को मिलने वाली सीटों का नया बंटवारा करेगा। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 800 से अधिक हो सकती है।
परिसीमन का मतलब चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों का नए सिरे से निर्धारण करना है। समय-समय पर जनसंख्या और क्षेत्रीय बदलावों को देखते हुए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव किया जाता है। यही प्रक्रिया परिसीमन कहलाती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी शहर की आबादी तेजी से बढ़ती है या किसी क्षेत्र की जनसंख्या का संतुलन बदलता है, तो उस आधार पर लोकसभा, विधानसभा या नगर निकाय के वार्डों की सीमाएं बदली जा सकती हैं ताकि सभी क्षेत्रों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिल सके।
यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो संविधान के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद नवीनतम उपलब्ध जनगणना के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटों का पुनर्निर्धारण होगा।
विधेयक के अनुसार, लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़कर 815 तक हो सकती है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान हो सकता है। इस तरह लोकसभा की कुल संख्या 850 सीटों तक पहुंच सकती है।
सरकार का कहना है कि वर्तमान सीटों का बंटवारा अभी भी 1971 की जनगणना पर आधारित है जबकि देश की आबादी और जनसांख्यिकीय स्थिति में बड़ा बदलाव आ चुका है। नए परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता भी साफ होगा। आरक्षित सीटों का रोटेशन भी किया जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके।
देश में शुरुआत में लोकसभा की 489 सीटें थीं। साल 1963 में 1961 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या बढ़ाकर 522 कर दी गई। इसके बाद 1973 में 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटें 543 हुईं, जो आज भी लागू हैं।
इसके बाद सीटों के पुनर्बंटवारे पर रोक लगा दी गई थी। पहले यह रोक 2001 तक थी, जिसे बाद में संविधान संशोधन के जरिए 2026 तक बढ़ा दिया गया। साल 2002 में परिसीमन जरूर हुआ लेकिन उस समय सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई थी। केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव किया गया था।
Updated on:
05 Aug 2026 02:59 pm
Published on:
05 Aug 2026 02:54 pm
