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Supreme Court का स्पष्टीकरण: कोर्ट रिपोर्टिंग पर नहीं, बल्कि ऑडियो-वीडियो क्लिप के इस्तेमाल पर है रोक

Supreme Court on Media can reporting: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान पहले की तरह अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकते हैं। हालांकि, वे अपनी खबरों में कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का उपयोग नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि उसके अंतरिम आदेश को मीडिया रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं समझा जाए। पढ़े- पूरी रिपोर्ट।
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Supreme Court Media Reporting.

सुप्रीम कोर्ट (Photo- IANS)

Supreme Court Media Reporting: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान पहले की तरह कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकते हैं। हालांकि, वे अपनी खबरों में कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं कर सकते। दरअसल, 31 जुलाई को जारी आदेश में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि इस संबंध में स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद कुछ भ्रम बना हुआ था।

इसलिए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। ऐसे समाचार संस्थान कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं। कानूनी घटनाक्रम और न्यायिक निर्णयों की जानकारी आम जनता तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि, ऐसी रिपोर्टिंग के दौरान अदालत की कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का उपयोग नहीं किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया था कि इस आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

यह स्पष्टीकरण 24 जुलाई को जारी सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से संबंधित है। उस आदेश में अदालत की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति निकाले जाने, प्रसारित करने, उससे कमाई (मॉनेटाइजेशन) करने, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, रीपोस्ट, अपलोड, ट्रांसमिट, संशोधित, स्टोर या होस्ट करने पर रोक लगाई गई थी। अब ऐसी रिकॉर्डिंग के उपयोग के लिए सुप्रीम कोर्ट के सचिव-जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को

इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया था। इस निर्देश में कहा गया था कि वह संबंधित मंत्रालयों से परामर्श कर याचिका में की गई मांगों को लागू करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। साथ ही, सभी हाईकोर्टों को अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग से संबंधित मॉडल नियमों को अपनाने की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने, निर्बाध और लगातार लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवहार्यता पर अपना पक्ष बताने का निर्देश भी दिया गया था। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है।