7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

LGBTQIA+ समिति को लेकर केंद्र पर बरसे शशि थरूर, बोले- 2 साल में नहीं आई एक भी रिपोर्ट, मकान और इलाज में बराबरी कब?

Congress MP Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने LGBTQIA+ समुदाय के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी की निष्क्रियता पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि दो साल में समिति की केवल दो बैठकें हुईं और अब तक कोई रिपोर्ट या सिफारिश सामने नहीं आई।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Anand Shekhar

•

Updated: 5 Aug 2026, 2:49 PM IST

Shashi Tharoor Gen Z, Gen Z Protest India, Indian Democracy, Shashi Tharoor Statement, Gen Z Protest, India Gen Z Movement, Shashi Tharoor NDTV Summit, South Asia Gen Z Protest, Indian Political System, Indian Democratic System,

कांग्रेस नेता शशि थरूर (सोर्स: ANI)

Shashi Tharoor on LGBTQIA+ Committee: कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने LGBTQIA+ समुदाय और समलैंगिक जोड़ों के अधिकारों और कल्याण के लिए बनाई गई हाई-पावर कमेटी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। संसद में मिले सरकारी जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कमेटी बनने के दो साल से ज्यादा समय बाद भी सिर्फ दो बैठकें हुई हैं और अब तक कोई रिपोर्ट या सिफारिश नहीं सौंपी गई है। शशि थरूर का आरोप है कि सरकार में LGBTQIA+ समुदाय को असली अधिकार देने या जरूरी कानूनी सुधार लागू करने की इच्छाशक्ति की कमी है।

समिति की शुरुआत से अबतक सिर्फ दो बैठकें

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान डॉ. शशि थरूर द्वारा पूछे गए अनस्टार्ड सवाल नंबर 2622 के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने समिति की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी। सरकार ने माना कि कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली इस कमेटी की शुरुआत से लेकर अब तक सिर्फ दो बैठकें हुई हैं। \

समिति की पहली बैठक पहली 21 मई 2024 को हुई थी और दूसरी बैठक 22 अगस्त 2024 को हुई। उसके बाद से कोई बैठक नहीं हुई है और दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी समिति ने अब तक ने सरकार को कोई रिपोर्ट या सुझाव नहीं दिया है।

सिर्फ एडवाइजरी जारी करने से असली अधिकार नहीं मिलते - शशि थरूर

अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर संसद का जवाब शेयर करते हुए डॉ. शशि थरूर ने कहा कि सरकार की सुस्ती उसके उदासीन रवैये को दिखाती है। शशि थरूर ने कहा कि सिर्फ प्रशासनिक सलाह या एडवाइजरी जारी करने से नागरिकों को कानूनी अधिकार नहीं मिलते। ठोस कानूनी सुधारों के बिना, LGBTQIA+ समुदाय के सदस्यों को घर किराए पर लेने, नौकरी, हेल्थकेयर, विरासत के अधिकार, संयुक्त वित्तीय लाभ या इमरजेंसी के समय मेडिकल फैसले लेने के मामले में समानता की गारंटी नहीं दी जा सकती।

क्या सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को खुश करने के लिए बनाई गई थी समिति?

सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए थरूर ने पूछा कि अगर सरकार का मानना ​​है कि सभी बड़े फैसले समिति के सुझावों पर आधारित होने चाहिए, तो समिति पिछले दो सालों से निष्क्रिय क्यों रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह हाई-लेवल कमेटी सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की औपचारिकताएं पूरी करने और कोर्ट को खुश करने के लिए बनाई गई थी, क्योंकि इसके काम को आगे बढ़ाने की कोई ठोस योजना नहीं दिख रही है।