
जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का विरोध करते छात्र
JPSC-JSSC Protest झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में अनशन पर बैठे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सामान्य भोजन ग्रहण नहीं करेंगे और फिलहाल केवल नमक-पानी के सहारे ही आंदोलन जारी रखेंगे।
वहीं, जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अनशन पर बैठे छह अन्य छात्रों का अनशन पहले की तरह जारी है। दरअसल, इस पूरे आंदोलन में दो अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। पहला स्वतंत्र छात्र संगठन का है, जबकि दूसरा झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) का, जिसे विधायक जयराम महतो का समर्थन प्राप्त है। देवेंद्र नाथ महतो जेएलकेएम गुट का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने 2 अगस्त से अन्न-जल का त्याग कर रखा था।
उधर, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 12 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन अब और उग्र होता नजर आ रहा है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। JPSC, JSSC-CGL, JPSC-FRO और ACF समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की सीबीआई जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र लगातार धरना दे रहे हैं। झमाझम बारिश के बावजूद छात्र प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं और दिनभर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं। मंगलवार शाम छात्रों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए मार्च भी निकाला।
इस बीच केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने इस मुद्दे पर विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार को पूरी तरह असंवेदनशील बताते हुए कहा कि आंदोलन शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि छात्रों से मिलने नहीं पहुंचा है। प्रदर्शन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी छात्रों ने नाराजगी जताई है। वहीं, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने हेमंत सोरेन सरकार पर भर्ती परीक्षाओं में सीटें बेचे जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए और पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं के अधिकारों की यह लड़ाई केवल रांची तक सीमित नहीं रहेगी। पेपर लीक, भर्ती में कथित अनियमितताओं और प्रदर्शन स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बीच छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सबकी नजर राज्य सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
Updated on:
05 Aug 2026 03:00 pm
Published on:
05 Aug 2026 02:40 pm
