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पटना हॉस्टल कांड ने कर दी ‘बालिका गृहकांड’ की यादें ताजा, जब 40 से अधिक बच्चियां हुई थीं हैवानियत का शिकार

पटना हॉस्टल कांड ने मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड की यादें ताजा कर दी हैं। साल 2018 में सामने आई एक रिपोर्ट में मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी की खबरें सामने आई थी। उस दौरान पूरा बिहार इस खबर से हिल गया था। पढ़ें पूरी खबर...

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महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न, प्रतिकात्मक तस्वीर (File Photo)

पटना के हॉस्टल में NEET परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा के रेप और मौत के बाद बिहार का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मामले में विपक्षी दलों ने नीतीश सरकार के खिलाफ सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम व राज्य के गृहमंत्री सम्राट चौधरी को चूड़ियां भेज दी हैं।

कांग्रेस ने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति बहुत खराब है और सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। महिला कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, "जब बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो गृह मंत्री को चूड़ियां पहन लेनी चाहिए। पटना हॉस्टल कांड ने एक बार फिर बिहार को मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड की याद दिला दी है।

क्या था मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस?

साल 2018 में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक बालिका गृह से यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले ने राज्य को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। मामले का खुलासा तब हुआ जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के लिए वर्ष 2017 में राज्य के विभिन्न शेल्टर होम्स का सोशल ऑडिट किया। इस ऑडिट रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर के "सेवा संकल्प एवम् विकास समिति" द्वारा संचालित बालिका गृह की स्थिति को "अत्यंत चिंताजनक" और "संदिग्ध" बताया गया।

बच्चियों में पाई गई बुरी लत

रिपोर्ट के मुताबिक शेल्टर होम की बच्चियों में बुरी लत पाई गई। उन्हें बंद कमरों में रखा जाता था। साफ-सुथरे कपड़े भी नहीं दिए जाते थे। कई बच्चियां कुपोषण का शिकार थीं। वहीं, कई ऐसी बच्चियां भी गईं, जिनके साथ यौन शोषण हुआ था। मार्च 2018 में जब यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुआ तो स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जल्द ही इस मामले को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। फिर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

सुशासन बाबू की छवि पर लगा था बड़ा दाग

इधर, सुशासन बाबू यानी सीएम नीतीश कुमार की छवि पर बड़ा दाग भी लग गया था। भारी दवाब के बाद तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने पद से दे दिया था। मंजू वर्मा का समाज कल्याण विभाग इस मामले में संदिग्ध था। साथ ही, शेल्टर होम संचालक के मालिक ब्रजेश ठाकुर से मंजू वर्मा और उनके पति के बीच कनेक्शन की बात भी सामने आई थी।

मेडिकल जांच में यौन उत्पीड़न बात आई सामने

वहीं, पुलिस की कार्रवाई शुरू होने के बाद शेल्टर होम में रहने वाली बच्चियों का मेडिकल जांच कराया गया। जहां बालिका गृह में रह रही 42 में से 34 नाबालिग लड़कियों (उम्र 7 से 17 वर्ष) के साथ यौन शोषण हुआ था। कई बच्चियों के साथ दरिंदगी को अंजाम देने के लिए उन्हें नशे का आदि बना दिया गया था।

20 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

इस मामले में 20 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इन पर आरोप था कि ये एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे, जोकि गरीब, अनाथ और बेसहारा लड़कियों को गृह में लाकर उनका यौन शोषण करता था और कई मामलों में वीडियो बनाकर ब्लैकमेल भी करता था। जांच और कानूनी प्रक्रियाप्रारंभ में बिहार पुलिस ने जांच की, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को जांच सौंपी गई।

आजीवन कारावास की सुनाई गई सजा

सीबीआई ने 2018-19 में गहन जांच की। जनवरी 2020 में मुजफ्फरपुर की विशेष POCSO अदालत ने 19 आरोपियों को दोषी करार दिया, जिसमें शेल्टहोम संचालक ब्रजेश ठाकुर भी शामिल था। इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि, जनवरी 2025 में एक अलग मामले (स्वाधार गृह कांड) में ब्रजेश ठाकुर, मधु और एक अन्य आरोपी कृष्णा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। लेकिन वे अन्य मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, इसलिए जेल से बाहर नहीं आए।