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‘पीस बॉन्ड संवैधानिक अधिकार को छीन रहा है, इसलिए नहीं करूंगी साइन’, नेहा बोरा ने बताई वजह

AISA Protest Delhi, Peace Bond Controversy: आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। जानें क्या है पूरा मामला...
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भारत

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Ashib Khan

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Updated: 24 Oct 2026, 1:34 PM IST

Neha Bora Peace Bond Case

नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करने की बताई वजह (Photo-IANS)

Neha Bora Peace Bond Case: आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने बताया कि उन्होंने पीस बॉन्ड पर इसलिए साइन नहीं किए, क्योंकि वह उनके संवैधानिक अधिकार को छीन रहा है। उन्होंने आगे कहा कि देश में कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के दौरान लोगों को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि ना तो वह साइन करेगी ना ही आइसा का कोई भी सदस्य इस पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करेगा।

SEM ने नेहा बोरा को जारी किया था नोटिस

बता दें कि दिल्ली में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में नेहा बोरा शामिल हुई थी। इसको लेकर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने नेहा को एक नोटिस जारी किया था। जिसमें उन्होंने पीएस बॉन्ड पर साइन करने के लिए कहा था। इस नोटिस के खिलाफ आइसा अध्यक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर रुख किया। लेकिन हाईकोर्ट ने भी नेहा की याचिका खारिज कर दी। 

नेहा बोरा ने क्या दी थी दलील?

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में नेहा बोरा ने नोटिस को अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया था। नेहा ने कहा था कि इससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का भी हवाला दिया। 

नेहा बोरा ने कहा था कि  नोटिस में ऐसा कोई पर्याप्त आधार नहीं बताया गया, जिससे यह साबित हो सके कि उनकी गतिविधियों से शांति भंग होने की आशंका थी।

उनकी ओर से यह भी कहा गया कि नोटिस में उस अवधि, अवसर या कार्यक्रम का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिसके संबंध में शांति भंग होने की आशंका जताई गई थी।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद 16 अक्टूबर को हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को अगले दिन, यानी 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया था। इसी दिन नई दिल्ली जिले की विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया था।

नोटिस में नेहा बोरा को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और एक जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इसका उद्देश्य शांति भंग होने की आशंका को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई करना बताया गया।

नेहा बोरा ने अधिवक्ता अभिक चिमनी के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस नोटिस को चुनौती दी थी।