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सड़क हादसे के बाद इलाज की टेंशन खत्म! सरकार देगी 1.5 लाख तक का तुरंत इलाज खर्च

PM Relief Scheme for Road Accident Victims: भारत सरकार की पीएम राहत योजना के तहत सड़क हादसे के पीड़ितों को “गोल्डन आवर” में तुरंत इलाज और आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें हर घायल को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज, एंबुलेंस सुविधा और शुरुआती दिनों का पूरा उपचार खर्च शामिल है, ताकि समय पर इलाज से जान बचाई जा सके।

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भारत

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Ashib Khan

Feb 17, 2026

Road Accident Cashless Treatment India: भारत सरकार ने पीएम राहत योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य सड़क हादसे के पीड़ितों को तुरंत इलाज और आर्थिक मदद देना है। हादसे के बाद पहले 1 घंटे (गोल्डन आवर) में इलाज सुनिश्चित करना इसका मुख्य लक्ष्य है। भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। अगर समय रहते चिकित्सा मदद मिले तो इनमें से लगभग 50% मौतों को रोका जा सकता है।

क्या लाभ मिलेगा?

  • दुर्घटना के हर पीड़ित को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज।
  • हादसे की तारीख से 7 दिन तक इलाज का खर्च कवर।
  • गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे तक इलाज।
  • गंभीर स्थिति में 48 घंटे तक तत्काल इलाज।

योजना का लाभ कैसे लें?

  • दुर्घटना होने पर 112 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
  • पीड़ित, राहगीर या कोई भी कॉल कर सकता है।
  • नजदीकी अस्पताल और एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी।

इलाज का खर्च कौन देगा?

  • अस्पताल का भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से होगा।
  • अगर वाहन का बीमा है तो खर्च बीमा कंपनी देगी।
  • हिट एंड रन या बिना बीमा के मामले में भारत सरकार खर्च उठाएगी।

क्या है जरूरी प्रक्रिया?

  • पुलिस द्वारा डिजिटल सिस्टम से दुर्घटना की पुष्टि जरूरी।
  • गैर-गंभीर केस: 24 घंटे में सत्यापन।
  • गंभीर केस: 48 घंटे में सत्यापन।

अस्पताल का क्लेम कितने दिन में मिलेगा?

  • राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की मंजूरी के बाद 10 दिन के अंदर भुगतान।
  • विवाद पर जिला स्तर पर शिकायत अधिकारी केस देखेगा।
  • जिला सड़क सुरक्षा समिति निगरानी करेगी।

गोल्डन आवर क्या होता है?

सड़क दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा “गोल्डन आवर” कहलाता है। यह समय घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान यदि तुरंत प्राथमिक उपचार, रक्तस्राव पर नियंत्रण, सांस की जांच और अस्पताल तक शीघ्र पहुंच सुनिश्चित कर दी जाए, तो मृत्यु और गंभीर विकलांगता का खतरा काफी कम हो जाता है। देरी होने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।