
प्रशांत किशोर (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Bankipur Bypoll Prashant Kishor: पटना में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के वोटों की गिनती से पहले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पुलिस प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पटना के SSP पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एजेंट की तरह काम करने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। प्रशांत किशोर ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा और अगर जरूरत पड़ी तो उनकी नौकरी छीनने के लिए अदालत तक की लड़ाई लड़ी जाएगी।
पुलिस के काम करने के तरीके को लोकतंत्र पर एक धब्बा बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि पुलिस ने पिछले दो दिनों में लगभग 54 जन सुराज कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस और सत्ताधारी पार्टी मिलीभगत से काम कर रहे थे। BJP के सदस्य लोगों की पहचान करते थे और फिर पुलिस आकर सिर्फ जन सुराज समर्थकों को उठा ले जाती थी।
प्रशांत किशोर ने पूछा कि अगर पुलिस वास्तव में निष्पक्ष रूप से काम कर रही थी, तो कितने BJP कार्यकर्ताओं या नेताओं को हिरासत में लिया गया। प्रशांत किशोर ने बताया कि BJP का एक भी सदस्य हिरासत में नहीं लिया गया, जबकि निर्दोष जन सुराज समर्थकों को निशाना बनाया गया।
प्रशांत किशोर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो दशक लंबे कार्यकाल में उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक शक्तियों का ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि पटना के SSP पुलिस की वर्दी की आड़ में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और मतदाताओं के बीच डर का माहौल बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जहां चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर और पटना के जिलाधिकारी (DM) कुंदन जी लगातार फोन उठा रहे थे, वहीं पटना के SSP एकमात्र ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने न तो फोन उठाया और न ही कोई जवाब या स्पष्ट निर्देश दिया, वे पूरी तरह से संपर्क से बाहर रहे। उन्होंने टिप्पणी की कि अगर SSP को राजनीति में इतनी दिलचस्पी है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और खुलकर राजनीति में आना चाहिए।
पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी करने आए ज्यादातर अधिकारी सादे कपड़ों में थे और उन्होंने गिरफ्तार किए गए लोगों को गिरफ्तारी का कारण भी नहीं बताया। कार्यकर्ताओं को नौबतपुर, फतुहा, शाहपुर और कंकड़बाग जैसे इलाकों के पुलिस स्टेशनों में ले जाकर हिरासत में रखा गया।
पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 90 साल के बुजुर्ग फेंकू पासवान को भी जक्कनपुर पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया था और कड़े विरोध के बाद उन्हें देर रात रिहा करना पड़ा। इसके अलावा, स्थानीय नागरिकों और नेताओं, जैसे संजय कुमार सिंह (न्यू जक्कनपुर), मनोज कुमार (ओल्ड जक्कनपुर), उज्ज्वल कांत (न्यू पुरंदरपुर), रवि नारायण प्रभाकर (बोरिंग रोड), नवल किशोर गुप्ता (नॉर्थ मंदिरी), संजीत चंद्रवंशी (सिफारा) और अफरोज अहमद उर्फ चिंटू (सब्जीबाग) को बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में लिया गया।
प्रशांत किशोर ने कहा कि वह इस मामले को दबने नहीं देंगे और इस मनमाने व्यवहार के बारे में चुनाव आयोग, जनरल ऑब्ज़र्वर और पुलिस ऑब्ज़र्वर को लिखित शिकायतें पहले ही सौंपी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही दिल्ली जाकर इस रवैये के खिलाफ भारत के चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। अगर चुनाव आयोग के स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
Updated on:
02 Aug 2026 02:45 pm
Published on:
02 Aug 2026 02:31 pm
