
- राजीव मिश्रा
चंद्रयान-3 मिशन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इसरो की महिला वैज्ञानिक डॉ.भुवनेश्वरी एस. का मानना है कि बदलते समय के साथ महिलाएं भी निर्णय करने वाले शीर्ष पदों तक पहुंचेंगी। युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित भुवनेश्वरी के नेतृत्व में विकसित चंद्रयान-3 के उपकरण (लिब्स) ने चंद्रमा पर सल्फर की मौजूदगी की पुष्टि की। उन्होंने 2009 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) से वैज्ञानिक कॅरियर शुरू किया। वह इसरो के रॉकेटों, उपग्रहों, स्मार्ट मैटिरियल्स आदि के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इसरो की इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स सिस्टम्स प्रयोगशाला में पदास्थापित भुवनेश्वरी से पत्रिका ने महिला दिवस पर विशेष बातचीत की।
- चंद्रयान-3 की सफलता में महिलाओं का अहम योगदान रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नारी शक्ति के योगदान की सराहना की। भारत में महिलाओं का विज्ञान के क्षेत्र में आगे आना कितना महत्त्वपूर्ण है?
चंद्रयान-3 मिशन के लॉन्च व्हीकल और अंतरिक्ष यान पे-लोड, दोनों में योगदान कर गर्व महूसस हो रहा है। इस प्रतिष्ठित मिशन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों का नेतृत्व किया। मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करती हूं कि विज्ञान, अनुसंधान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी काफी महत्त्वपूर्ण है। महिला को उन्नत अनुसंधान का नेतृत्व करते देख भावी पीढ़ी की लड़कियां उच्च शिक्षा और विज्ञान से संबंधित विषयों को चुनने के लिए प्रेरित होंगी। विविध नव अनुसंधानों के लिए वैज्ञानिक समुदाय का निर्माण होगा। जैसा मैडम क्यूरी और रोजलिंड फ्रैंकलिन ने किया। यह लैंगिंक समानता को बढ़ावा देगा। साथ ही वैज्ञानिक और अनुसंधान संगठनों में सहायक और समावेशी टीमें बनेंगी।
- महिलाएं अपनी स्थिति स्वयं कैसे बदल सकती हैं?
किसी भी स्थिति को बदलने की कुंजी यह है कि पीड़ित या लाचार महसूस न करें। जैसा मैरी क्यूरी ने कहा था, जीवन में किसी भी चीज से डरना नहीं है, केवल समझना है। चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी हमेशा अवसर की तलाश करें। विफलताएं हमें आगे बढ़ने के तरीके सिखाएंगी। किसी भी स्थिति से निपटने के प्रति सकारात्मक सोच महिलाओं को सफलता की राह पर ले जाएगी।
- क्या महिलाओं को कुछ अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
पहले की तुलना में स्थितियां काफी सुधरी हैं। फिर भी विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को लैंगिक रुढि़वादिता और भेदभाव के अलावा कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत में कामकाजी महिला के लिए मुख्य चुनौती कार्य और जीवन के बीच संतुलन बनाना है। विज्ञान के क्षेत्र में कॅरियर के शुरुआती दिनों में महिलाएं अपने काम में उत्कृष्टता प्राप्त करती हैं, लेकिन मध्य और वरिष्ठ स्तर पर पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वैज्ञानिक कॅरियर की डिमांड को संतुलित करना वास्तव में चुनौतीपूर्ण होता है। इस स्तर पर महिला वैज्ञानिकों को अक्सर अपने परिवार और सहकर्मियों के सहयोग की आवश्यकता होती है। अधिकांश महिलाएं अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पातीं, जिससे शीर्ष प्रबंधन और निर्णय करने वाली भूमिकाओं में उनका प्रतिनिधित्व कम है। बदलते समय के साथ महिलाएं समुचित लक्ष्य और सीमाएं निर्धारित करेंंगी। एक मजबूत सहयोगी नेटवर्क और समावेशी टीम बनाकर सबसे आगे हो सकती हैं।
- आप घर और कार्यालय की जिम्मेदारियों को कैसे संतुलित करती हैं?
मैं अपनी दैनिक गतिविधियों और कार्यालय की जिम्मेदारियों के लिए समय का निर्धारण कर संतुलन बनाती हूं। अपने कार्यों की सूची (टू-डू लिस्ट) तैयार करती हूं और उसी के हिसाब से चलती हूं। किसी विशेष दिन कार्यालय में पूरी की गई गतिविधियों और अगले दिन की जिम्मेदारियों को दैनिक आधार पर एक्सेल-शीट में लिखती हूं। इससे ट्रैक पर बने रहने और कार्यालय में अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने में मदद मिलती है। जब घर पर कोई आपात स्थिति होती है तो परिवार मदद के लिए आगे आता है।
- महिला दिवस पर आपका क्या संदेश है?
जब एक बार तितली अपने कोकून से बाहर आ जाती है तो वह कभी कैटरपिलर नहीं बनती। हम भी इस तरह से बढ़ रहे हैं कि फिर उस स्थिति में नहीं जा सकते, जिसके हम आदी रहे। जीवन में आने वाली चुनौती को मुस्कान के साथ स्वीकार करें और बदलावों का स्वागत करें।
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Published on:
08 Mar 2024 09:06 am

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