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राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15.15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप: LIC के डूबे करोड़ों, 3 साल में 80% टूटा यह शेयर

Rajesh Exports पर 15.15 लाख करोड़ की हेराफेरी के आरोप लगे हैं। SEBI जांच में फर्जी लेनदेन और निवेश का खुलासा हुआ, जिससे निवेशकों को करीब 12,726 करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।

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भारत

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Ankit Sai

Jun 04, 2026

Rajesh Exports

राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप (x Photo)

Rajesh Exports Scam: देश के कॉर्पोरेट इतिहास में एक बड़े घोटाले का दावा सामने आया है, जिसमें राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा है। सेबी (SEBI) की अंतरिम जांच में कंपनी और इसके प्रमोटर पर फर्जी राजस्व दिखाने, बिना सबूत विदेशी निवेश दर्ज करने और फर्जी लेनदेन करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। वहीं, एलआईसी (LIC) की बड़ी हिस्सेदारी और निवेशकों के करीब 12,726 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है। कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दस्तावेजी सबूत पेश करने की बात कही है।

15.15 करोड़ रुपये की हेराफेरी

यह मामला सोने के कारोबारी राजेश एक्सपोर्ट्स से जुड़ा है। बाजार नियामक सेबी ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए कंपनी और इसके प्रमोटर-चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में एंट्री करने पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। कंपनी पर पिछले 5 वित्तीय वर्षों (FY21 से FY25) के दौरान 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व (Revenue) की हेराफेरी और गलत जानकारी देने का आरोप है।

1,035 करोड़ रुपये का निवेश कहीं नहीं मिला

SEBI की जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। कंपनी ने कागजों पर दिखाया था कि उसने अफ्रीका में सोने की खदानों (Gold Mining Assets) में 1,035 करोड़ रुपये का निवेश किया है। लेकिन जब SEBI और फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने इसके सबूत मांगे। तो SEBI को इस निवेश से जुड़ा कोई भी पुख्ता सबूत नहीं मिला। अब यह आशंका जताई जा रही है कि बैलेंस शीट को बड़ा दिखाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया था।

11,487 करोड़ के फर्जी लेनदेन का हुआ खुलासा

जांच में एक और बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई। राजेश एक्सपोर्ट्स के बही-खातों में 'एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स प्राइवेट लिमिटेड (Affluence Shares and Stocks Private Limited) के साथ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई गई थी। लेकिन जब जांच टीम एफ्लुएंस कंपनी के पास पहुंची, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर बयान दिया कि 'राजेश एक्सपोर्ट्स उनकी कभी क्लाइंट रही ही नहीं और ऐसा कोई एग्रीमेंट कभी हुआ ही नहीं था।'

पर्सनल अकाउंट में गया कंपनी का पैसा

जांच के दौरान SEBI ने पाया कि कंपनी के फंड को प्रमोटर राजेश मेहता के पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया था। करीब 7.4 करोड़ रुपये राजेश मेहता के निजी खातों में भेजे गए, जिसका इस्तेमाल पर्सनल डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए किया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन लेन-देन के लिए बोर्ड से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी और न ही निवेशकों को इसकी कोई भनक लगने दी गई।

LIC को लगा तगड़ा झटका, क्या आम जनता के डूबे पैसे?

इस घोटाले की आंच अब देश के करोड़ों आम परिवारों तक पहुंच चुकी है। दरअसल, सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8% की बड़ी हिस्सेदारी है। LIC में लगा पैसा देश की आम जनता की पॉलिसी का पैसा है। इस गड़बड़ी के कारण निवेशकों के करीब 12,726 करोड़ रुपये डूब चुके हैं।

कंपनी ने दी सफाई, कहा- हमारे आंकड़े बिल्कुल सही हैं

इस पूरे बवाल और SEBI के कड़े एक्शन के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया कि 'कंपनी द्वारा घोषित राजस्व सही है और राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है' कंपनी ने आगे कहा, 'SEBI और कंपनी के बीच किसी तरह की बातचीत की कमी और भ्रम प्रतीत होता है। कंपनी सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज जमा करके SEBI के समक्ष सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में है।

509 करोड़ रुपये वसूलने के लिए होगी नीलामी

अब इस कंपनी के सामने दोतरफा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ सेबी है, तो दूसरी तरफ केनरा बैंक (Canara Bank) ने कंपनी को दिए गए कर्ज को स्ट्रेस्ड एसेट घोषित कर दिया है। कंपनी पर बैंक का करीब 509 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे वसूलने के लिए बैंक अब इस एसेट को नीलाम करने की तैयारी कर रहा है।

शेयर बाजार में हाहाकार, 80% टूट चुका है स्टॉक

लेकिन बाजार ने इस खबर के आते ही अपना फैसला सुना दिया। जैसे ही सेबी का आदेश पब्लिक हुआ, राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया। पिछले 3 सालों में इस शेयर ने अपने निवेशकों को कंगाल कर दिया है और इसकी कीमत 80% से ज्यादा गिर चुकी है। हालांकि, यह सेबी का अंतिम फैसला नहीं है, यह एक अंतरिम आदेश है और कंपनी को अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा मौका मिलेगा।