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अरविंद केजरीवाल ने पूछा- क्या भारत अपना सोना बेच रहा है? RBI ने किया बड़ा खुलासा, जानिए पूरा मामला

भारत का Gold बेचने की खबरों से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। Arvind Kejriwal के सवालों के बीच RBI ने सफाई देते हुए कहा कि 880.52 टन गोल्ड रिजर्व में कोई कमी नहीं आई है।
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भारत

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Ankit Sai

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Updated: 3 Jun 2026, 8:54 PM IST

Arvind Kejriwal

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (File Photo- Patrika)

Gold Sale Controversy: भारत का सोना बिक रहा है, सरकार आर्थिक दबाव में है और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए रिजर्व बैंक को गोल्ड बेचना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरों ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी। मामला तब और गरमा गया जब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछ दिए। बढ़ते विवाद के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी है।

क्या RBI ने बेचा है सोना

विवाद की शुरुआत उन रिपोर्ट्स से हुई जिनमें दावा किया गया कि पिछले दो हफ्तों के दौरान RBI ने करीब 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि भारतीय रुपये पर बढ़ता दबाव और बढ़ती तेल कीमतों के साथ-साथ आयात बढ़ोतरी के कारण विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने के लिए यह कदम उठाया गया। इन दावों के सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा कि क्या देश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि सोने के भंडार को बेचना पड़ रहा है।

केजरीवाल ने सरकार से पूछे सवाल

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने लिखा कि क्या यह खबर सच है? क्या देश का सोना बेचा जा रहा है?, क्या सरकार इतनी दिवालिया हो गई है? पिछले 76 सालों में ऐसे कई मौके आए हैं, जब देश मुश्किल हालात में था। लेकिन देश का सोना कभी नहीं बेचा गया। क्या इसका मतलब यह है कि हालात बेहद खराब हैं? सरकार हमें कुछ बताती क्यों नहीं? देश की हालत कैसी है।

जानिए RBI ने क्या-क्या कहा है

RBI ने सीधे तौर पर इन रिपोर्ट्स का खंडन किया। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कहा, RBI इस बात पर जोर देता है कि ये रिपोर्टें सही नहीं हैं। RBI ने बताया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार अब भी 880.52 टन है और इसमें कोई कमी नहीं आई है। केंद्रीय बैंक ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक आंकड़ों को देखें। RBI ने यह भी याद दिलाया कि उसके गोल्ड रिजर्व से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से आरबीआई मंथली बुलेटिन (RBI Monthly Bulletin) में प्रकाशित की जाती है।

आखिर RBI के आंकड़े क्या बताते हैं

RBI के आंकड़े इन दावों को कमजोर करते हैं। साल 2025 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी। 31 मार्च 2026 तक यह बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गई। वहीं 22 मई 2026 तक यह आंकड़ा 16.85 प्रतिशत पहुंच गया। अगर RBI ने वास्तव में बड़ी मात्रा में सोना बेचा होता, तो विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी घटनी चाहिए थी। लेकिन आंकड़े इसके उलट तस्वीर दिखा रहे हैं।

RBI के लिए सोना क्यों महत्वपूर्ण है

दुनिया के अधिकांश केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना रखते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इससे किसी एक मुद्रा, खासकर अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होती है। इसके अलावा आर्थिक संकट, युद्ध या वैश्विक अस्थिरता के समय सोना सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। मजबूत गोल्ड रिजर्व किसी भी देश की वित्तीय स्थिति पर भरोसा बढ़ाने का काम करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी आर्थिक साख को मजबूत बनाता है।