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Rahul Gandhi Parliament Protest: “राहुल गांधी बहस से भाग रहे हैं?” रविशंकर प्रसाद का संसद से बड़ा हमला, धरने पर भी उठाए सवाल

Ravi Shankar Prasad on Rahul Gandhi: संसदीय बहस से भागकर धरना देने की राजनीति देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए फ़ास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का कड़ा फैसला लिया है। इसके बावजूद विपक्ष चर्चा की जगह अराजकता फैलाने पर आमादा है।
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Ravi Shankar Prasad Rahul Gandhi

BJP MP Ravi Shankar Prasad : रविशंकर प्रसाद का राहुल गांधी पर तीखा वार, बोले- संसद में बहस नहीं, सिर्फ राजनीति कर रहे हैं (फोटो सोर्स: ANI)

Ravi Shankar Prasad Rahul Gandhi: देश के करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत देश में परीक्षा धांधली और पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए फ़ास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) का गठन किया जा रहा है। सरकार का साफ़ संदेश है कि युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी माफिया को बख्शा नहीं जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बात करते हुए सरकार की इस दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए पूरी तरह समर्पित है।

Rahul Gandhi Parliament Protest: 'बहस से भाग रहे राहुल गांधी' संसद से धरने तक की राजनीति पर घमासान

संसद के वर्तमान सत्र में जारी हंगामे के बीच रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार सदन के पटल पर हर मुद्दे पर खुली और तथ्यात्मक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, तब विपक्ष चर्चा से कतरा रहा है।

"राहुल गांधी बिना किसी पूर्व सूचना के धरने पर बैठ गए। वे संसद के भीतर स्वस्थ बहस में भाग नहीं लेना चाहते। यह गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का पराकाष्ठा है। उनका एकमात्र मकसद रचनात्मक सुझाव देने के बजाय केवल अराजकता का माहौल पैदा करना है।"

- रविशंकर प्रसाद, बीजेपी सांसद

बीजेपी नेता ने कहा कि सत्ता पक्ष के पास युवाओं के हित में किए गए कार्यों और कड़े कानूनों का पूरा ब्योरा है, जिसे वे सदन में रखना चाहते हैं। लेकिन विपक्ष का यह व्यवहार संसदीय गरिमा और लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है।

कड़े कानून से फास्ट-ट्रैक कोर्ट तक का सफर

देश में हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। हाल ही में लागू किए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संगठित अपराध में शामिल तत्वों के लिए 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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