15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

युवाओं की पहली पसंद बनी धार्मिक यात्राएं, हरिद्वार-तिरुपति और अजमेर शरीफ बने पसंदीदा स्थल

Youth forefront of religious pilgrimages: एजेंसी की नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2024 में हर चौथे यानी 25% भारतीयों ने धार्मिक स्थलों की यात्रा की।

2 min read
Google source verification

Youth forefront of religious pilgrimages: धार्मिक पर्यटन भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था का आधार है। कंसल्टेंसी एजेंसी कंटार की नवीनतम टीजीआई रिपोर्ट से एक बार फिर इसकी पुष्टि हुई है। एजेंसी की नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2024 में हर चौथे यानी 25% भारतीयों ने धार्मिक स्थलों की यात्रा की। गौर करने की बात यह है कि इन धार्मिक यात्राओं में सबसे आगे देश का युवा वर्ग है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि धार्मिक यात्राओं का रुझान दक्षिण और उत्तर भारत दोनों में समान रूप से मौजूद है। धार्मिक यात्राओं में युवा वर्ग की इस बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी इस बात की गवाही देती है कि 21वीं शताब्दी में भी भारत में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं और आस्था-प्रेरित यात्रा के प्रति झुकाव कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है।

हरिद्वार से लेकर तिरुपति और अजमेर शरीफ हैं सबसे चहेते

1- हरिद्वार सबसे आगे: रिपोर्ट में हरिद्वार भारत में सबसे अधिक दर्शनीय धार्मिक स्थल के रूप में उभरा है, जिसके बाद शिरडी, तिरुपति, अयोध्या और अजमेर शरीफ का स्थान आता है। विशेषकर उत्तर भारतीयों में हरिद्वार (54%) सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।
2- तिरुपति जाते हैं दक्षिण भारतीयः धार्मिक यात्राएं निकटता और पारिवारिक यात्रा परंपराओं से प्रभावित है। दक्षिण भारतीय मुख्य रूप से तिरुपति (82%) जाते हैं, उसके बाद शिरडी (59%) की यात्रा करते हैं।

यह भी पढ़ें- Delhi Election: दिल्ली में पोस्टर वॉर पर गरमाई सियासत, बीजेपी बोली- पूर्वांचल विरोधी हैं केजरीवाल, आप ने भाजपा नेताओं को बताया ‘गालीबाज दानव’

उम्र और लिंग का तीर्थयात्रा पर असर, अयोध्या जाने वालों में पुरुष आगे

1- रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश धार्मिक यात्री 25-44 आयु वर्ग में आते हैं। 25-34 आयु वर्ग के लोग हरिद्वार को प्राथमिकता देते हैं, जबकि 35-44 आयु वर्ग के लोगों ने अयोध्या को प्राथमिकता दी।
2- हरिद्वार (61%) और अयोध्या (69%) के तीर्थ यात्रियों में पुरुषों का बहुमत देखा गया है। यह बताया है कि इन स्थलों को महिलाओं के लिए अधिक आकर्षक बनाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

संपन्न वर्ग है सबसे आगे

सामाजिक-आर्थिक रुझान: धार्मिक पर्यटन में मुख्य रूप से धनी वर्ग का वर्चस्व है, जिसका प्रतिनिधित्व एनसीसीएस (न्यू कंज्यूमर क्लासिफिकेशन सिस्टम) में ए श्रेणी का सामाजिक-आर्थिक वर्ग करता है।

एक्सपर्ट राय

ब्रांडों के लिए धार्मिक पर्यटन हैं बड़ा अवसर

धार्मिक पर्यटन ब्रांडों को विविध और आध्यात्मिक रूप से प्रेरित दर्शकों से जुड़ने के लिए एक अद्वितीय मंच प्रदान करता है। कंटार की आगामी महाकुंभ मेला रिपोर्ट तीर्थयात्रियों की खर्च करने की आदतों, यात्रा पैटर्न और वरीयताओं पर गहराई से विचार करेगी। रिपोर्ट में धार्मिक पर्यटन पर डिजिटल प्लेटफॉर्म, यात्रा ऐप्स और ऑनलाइन भुगतान विधियों के प्रभाव की भी जांच की जाएगी, जो पारंपरिक प्रथाओं में प्रौद्योगिकी के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।
-पुनीत अवस्थी, निदेशक, कंतार, दक्षिण एशिया