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‘अमित शाह का फोन आने पर खत्म हो जाती है नैतिकता?’, सागरिका घोष ने बागी टीएमसी नेताओं पर साधा निशाना

TMC Inner Conflict: पश्चिम बंगाल विधासनभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद से ही पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ती ही जा रही है। विधायक और सांसदों समेत कई नेता बागी हो गए हैं। इसी बीच अब टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने पार्टी के बागी नेताओं पर निशाना साधा है।

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भारत

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Tanay Mishra

Jun 09, 2026

Sagarika Ghose

सागरिका घोष (File Photo)

पश्चिम बंगाल विधासनभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में हार के झटके से तृणमूल कांग्रेस - टीएमसी (Trinamool Congress - TMC) उबर नहीं पा रही है। यहीं वजह है कि टीएमसी में अंदरूनी कलह बढ़ती ही जा रही है और पार्टी के टूटने की नौबत आ गई है। करीब 58 विधायकों ने तो पहले ही बगावत के सुर छेड़ दिए थे, अब करीब 20 सांसद भी बागी हो गए हैं। जानकारी के अनुसार टीएमसी के करीब 20 सांसद भारतीय जनता पार्टी - बीजेपी (Bharatiya Janta Party - BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन - एनडीए (National Democratic Alliance - NDA) को समर्थन देने की तैयारी में हैं। टीएमसी नेताओं के बगावती सुर को देखते हुए पार्टी की सांसद सागरिका घोष (Sagarika Ghose) ने इन पर निशाना साधा है।

"भारत के कीमती लोकतांत्रिक स्पेस को खत्म कर रही है बीजेपी"

सागरिका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "2024 में मेरे लिए निजी मामला राजनीतिक बन गया। मैंने सार्वजनिक जीवन में इसलिए कदम रखा क्योंकि मेरा पक्का मानना ​​है कि पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली बीजेपी भारत के कीमती लोकतांत्रिक स्पेस को खत्म कर रही है। साथ ही मेरा यह भी मानना ​​है और हमेशा रहेगा कि संविधान-विरोधी, सांप्रदायिक सोच वाली और धार्मिक युद्ध भड़काने पर आमादा बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की संवैधानिक लड़ाई सही है।"

"ममता की राजनीति सभी नागरिकों के लिए है प्रेरणा"

सागरिका ने आगे लिखा, "मैं ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के शानदार नेतृत्व में हमेशा विश्वास करती रही हूं और करती रहूंगी। उनकी अटूट हिम्मत और मूल्यों पर आधारित राजनीति सिर्फ सभी महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा है।"

"पार्टी के हारते ही पाला बदल लेते हैं लोग"

सागरिका ने आगे लिखा, "मुझे जो बात अजीब लगती है, वो यह है कि एक पार्टी के चुनाव चिह्न और किसी खास नेता के नाम पर चुनाव जीतने का कल्चर, और फिर हार का सामना करते ही उस पार्टी और नेता को छोड़ देना। अगर चुनाव के नतीजों के साथ आपकी धारणाएं बदल जाती हैं, तो क्या वो सच में धारणाएं थीं? आप पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ते हैं। आप वोटरों से पार्टी के एजेंडे पर भरोसा करने को कहते हैं। आप उस पार्टी के समर्थन और नेताओं की अपील की वजह से जीतते हैं। लेकिन जब पार्टी हारती है, तो आप तुरंत पाला बदल लेते हैं।"

"अमित शाह का फोन आने पर खत्म हो जाती है नैतिकता?"

सागरिका ने आगे लिखा, "अगर वफादारी सिर्फ जीत तक ही रहती है, तो जनादेश असल में किसलिए था? या फिर क्या ऐसा तब होता है जब अमित शाह (Amit Shah) और उनके साथी फोन करते हैं, और आप आज्ञाकारी बनकर कतार में खड़े हो जाते हैं और सारी नैतिकता खत्म हो जाती है? यह शर्म की बात है।"

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