
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष पर साधा निशाना (Photo-IANS)
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा है। बीजेपी नेता ने कहा कि देश में यह नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई कि कुछ लोग सिर्फ तिरंगा फहराना चाहते थे, लेकिन सरकार ने तानाशाही दिखाते हुए उन्हें रोक दिया। जबकि मामला केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने का नहीं, बल्कि शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा है।
बीजेपी नेता संबित पात्रा के मुताबिक, सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों ने पहले शांति बनाए रखने का आश्वासन देते हुए पीस बॉन्ड भरा था, लेकिन रिहाई के कुछ ही घंटों बाद उसकी शर्तों का उल्लंघन किया। पात्रा ने कहा कि इस घटनाक्रम से उन लोगों के दावों पर सवाल खड़े होते हैं, जो उनकी हिरासत को केवल तिरंगा फहराने की इच्छा से जोड़ रहे थे।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने पूरे देश में यह धारणा बनाने की कोशिश की कि सरकार भारतीय ध्वज फहराने तक की अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने इसे जनता को गुमराह करने की कोशिश बताते हुए कहा कि अदालत में हुई सुनवाई से इस दावे की वास्तविकता पर सवाल उठे हैं।
पात्रा ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान हर भारतीय के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन तिरंगे की आड़ लेकर देश में अशांति फैलाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की छूट नहीं दी जा सकती।
संबित पात्रा ने सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की उम्र को लेकर अदालत में हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, जब अदालत ने संबंधित लोगों की उम्र पूछी तो एक ने 27 वर्ष और दूसरे ने 31 वर्ष बताई। पात्रा ने कहा कि अदालत ने इस संदर्भ में टिप्पणी की कि वे जेन-जी (Gen Z) नहीं हैं।
उन्होंने इस टिप्पणी के आधार पर प्रदर्शनकारियों की ओर से खुद को युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि बताने के दावे पर सवाल उठाए।
पात्रा के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की शुरुआत में युवा सड़कों पर उतरे थे और उस समय मुद्दा कुछ अलग था, लेकिन अब मुद्दा बदल गया है, जबकि इसमें शामिल लोग वही हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने इस टिप्पणी को आधार बनाते हुए दावा किया कि देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के पीछे एक ही समूह की भूमिका और पहले से तय रणनीति होने के सवाल उठते हैं।
संबित पात्रा ने बताया कि अदालत ने प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने की आशंका पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, यदि आयोजक प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण खो देते हैं, तो विरोध-प्रदर्शन आगजनी, लूटपाट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं में बदल सकते हैं। इससे जान-माल के नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में शांति भंग करने या अराजकता फैलाने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
Updated on:
21 Oct 2026 05:27 pm
Published on:
21 Oct 2026 04:50 pm
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