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‘अगर जयचंद न होते तो बीजेपी की 100 पीढ़ियां भी नहीं जीत पाती’…चुनाव में हार के बाद संजय राउत का बड़ा बयान

बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद संजय राउत ने बीजेपी पर हमला करते हुए पार्टी के भीतर गद्दारी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के अंदर जयचंद न होते तो बीजेपी को कभी जीत हासिल नहीं होती।

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भारत

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Himadri Joshi

Jan 17, 2026

Sanjay Raut

संजय राउत (फोटो- एएनआई)

महाराष्ट्र की राजनीति में बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। मुंबई की सत्ता को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है। चुनाव में मिली करारी हार के बाद शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला है। राउत ने कहा कि अगर उनकी पार्टी के भीतर जयचंद न होते तो बीजेपी सौ पीढ़ियों में भी मुंबई में मेयर की कुर्सी नहीं जीत पाती।

शिवसेना यूबीटी का मुख्य फोकस मुंबई - राउत

बीएमसी चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के भीतर कुछ लोगों ने गद्दारी की, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के कई नगर निकायों के नतीजे घोषित हो चुके थे, लेकिन शिवसेना यूबीटी का मुख्य फोकस मुंबई पर रहा। राउत के आगे कहा कि बीजेपी को ज्यादा सीटें मिलने के कारण उसका उम्मीदवार मेयर बनेगा। लेकिन इसके पीछे राजनीतिक चाल और अंदरूनी विश्वासघात बड़ी वजह रहे, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।

बीजेपी गठबंधन की जीत और बदली सियासी तस्वीर

बता दें कि, बीएमसी चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की है। इस नतीजे के साथ ठाकरे परिवार का मुंबई की नगर राजनीति पर 25 साल पुराना दबदबा खत्म हो गया। महायुति गठबंधन ने महाराष्ट्र के 29 में से 25 नगर निकायों में सत्ता हासिल की है। बीएमसी में बीजेपी शिवसेना गठबंधन ने 118 वार्ड जीते, जिनमें बीजेपी को 89 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 वार्ड मिले। बहुमत का आंकड़ा 114 रहा।

शिवसेना यूबीटी की स्थिति और आगे की रणनीति

चुनाव में झटका लगने के बावजूद संजय राउत ने कहा कि शिवसेना यूबीटी की राज्य विधानसभा में स्थिति अब भी मजबूत है। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी आगे की राजनीति में मजबूती से खड़ी रहेगी। बीएमसी जैसे देश के सबसे अमीर नगर निकाय में सालों बाद चुनाव हुए, जहां 227 सीटों के लिए करीब 1700 उम्मीदवार मैदान में थे। पूरे महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के आंकड़े बीजेपी के पक्ष में झुकाव दिखाते हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।

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