24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये का त्रिपक्षीय समझौता नई दिल्ली के लिए क्यों है चुनौती?

सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये के त्रिपक्षीय रक्षा समझौते से भारत की बढ़ी चिंता, लाल किला धमाके से लेकर ISI की भर्ती तक जानें पूरा सुरक्षा खतरा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Pushpankar Piyush

•

Updated: 11 Aug 2026, 12:42 PM IST

defense agreement in Mecca.

मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने किया बड़ा रक्षा समझौता | (फोटो - @iYogeshMishra)

7 अगस्त को पाकिस्तान-तुर्किये और सऊदी अरब ने त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। दुनिया भर में इसे इस्लामिक नेटो और सुन्नी नेटो की संज्ञा दी गई। नई दिल्ली की तरफ से कहा गया कि वह इस पर नजर बनाए हुए है। नई दिल्ली के लिए यह सामरिक चुनौती के साथ साथ सुरक्षा चुनौती भी बनकर खड़ा हुआ है। क्योंकि, पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन अब भारत विरोधी कार्रवाई के लिए तुर्किये और रियाद को अपना बेस बना सकते हैं। वह ऐसा पहले कर भी चुके हैं।

आतंकी उमर साल 2022 में गया था अंकारा

पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास एक कार बम धमाके में 15 लोग मारे गए, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हो गए। कश्मीर का रहने वाला डॉ. उमर उन नबी नाम ने फिदायीन हमले को अंजाम दिया था। इस व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में शामिल आतंकी नबी और उसके सहयोगी मुजम्मिल शकील ने 2022 में अंकारा की यात्रा के दौरान 'अंसार गजवत-उल-हिंद' के अपने हैंडलर्स से मुलाकात की थी। इससे पहले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन सऊदी अरब में अपना बेस बनाकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे चुके हैं।

सऊदी अरब में लश्कर करता था फंड इकट्ठा करने का काम

कुछ रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह पहले दशक में सऊदी अरब से फंड जुटाते रहे हैं। HT की रिपोर्ट्स के अनुसार, हैदराबाद में जन्मा महमूद अहमद बहाजिक सऊदी अरब में लश्कर ए तैयबा के लिए फंड इकट्ठा करने का काम करता था। बहाजिक को 2008 में UN ने आतंकवादी घोषित किया था।

उमरा और हज पर जाने वाले भारतीयों को फंसाती थी ISI

पाकिस्तान का 'डीप स्टेट' सऊदी अरब जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों का इस्तेमाल उन्हें भारत के अंदरूनी इलाकों में हमलों के लिए कट्टरपंथी बनाने में करता था। 2002 के गुजरात दंगों के नाम पर भारत के खिलाफ हमलों के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब और खाड़ी देशों में भारतीय मूल के कई लोगों को भर्ती किया था।

नई दिल्ली की कई कोशिशों के बाद रियाद ने अपने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किया था। इसके बाद सऊदी अरब में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की डीप स्टेट की गतिविधियां काफी कम हो गई थी। लेकिन, सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की चिंता है कि मक्का पैक्ट तीनों सुन्नी देशों को काफी करीब लाएगा और इसका फायदा पाकिस्तानी आतंकी संगठन भी उठा सकते हैं।

2022 रूसी खुफिया एंजेसी ने दिया था इनपुट

तुर्किये को लेकर हाल के दिनों में चिंता सामने आने की बड़ी वजह ये भी है कि अगस्त 2022 में रूसी खुफिया एजेंसी FSB ने एक ऐसे आतंकवादी को हिरासत में लिया था, जिसे तुर्किये में इस्लामिक स्टेट के एक नेता ने भारत में आत्मघाती बम धमाका करने के लिए भर्ती किया था। रूसी FSB ने भारत के साथ बहुत कम जानकारी साझा की, लेकिन बताया कि हमलावर मध्य एशिया का रहने वाला था। वह पहले ऑनलाइन कट्टरपंथी बना और फिर तुर्की के इस्तांबुल में IS के एक अज्ञात प्रतिनिधि ने उसे आत्मघाती बम धमाके की ट्रेनिंग दी।