
Shashi Tharoor Statement on Pakistan (Image: Gemini)
Shashi Tharoor Statement on Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम को लेकर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इस मुद्दे पर एक अलग ही नजरिया पेश किया है। उनका कहना है कि अगर पाकिस्तान ने इस समझौते में कोई सकारात्मक भूमिका निभाई है, तो भारत को उसे संदेह की नजर से देखने के बजाय शांति के प्रयास के तौर पर देखना चाहिए।
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में थरूर ने साफ कहा कि हर अंतरराष्ट्रीय घटना को प्रतिस्पर्धा के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर पाकिस्तान शांति की दिशा में काम कर रहा है, तो यह ऐसी चीज है जिसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर स्थिति को 'जीरो-सम गेम' की तरह देखना सही नहीं होता, जहां एक की जीत दूसरे की हार मानी जाए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान किसी नकारात्मक गतिविधि में शामिल होता, तो वह चिंता का विषय होता। लेकिन जब वही देश शांति की पहल में शामिल है, तो उसे अलग नजरिए से देखना चाहिए।
शशि थरूर ने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर देखने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, यह संभव है कि पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में एक डिप्लोमेटिक कवर की तरह काम कर रहा हो, जबकि असली पहल कहीं और से आई हो।
इसके बावजूद उन्होंने यह माना कि पाकिस्तान की स्थिति इस मामले में अहम है। ईरान के साथ उसकी करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है और अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता तो उसका सीधा असर पाकिस्तान पर भी पड़ता, खासकर शरणार्थियों के रूप में। ऐसे में पाकिस्तान का इस प्रक्रिया में शामिल होना स्वाभाविक है।
थरूर ने इस पूरे मामले में भारत सरकार के रुख की भी सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह से संतुलित प्रतिक्रिया दी है, वह 'परिपक्व और समझदारी भरा' कदम है। उनके अनुसार, भारत को ऐसे मामलों में संयम बनाए रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो इसका फायदा भारत को भी मिलेगा खासकर ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से।
थरूर ने इस मौके पर वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नियमों पर आधारित थी, वह अब कमजोर होती दिख रही है। आज की दुनिया में कई बार ऐसा लगता है कि ताकतवर देश अपनी शर्तों पर फैसले ले रहे हैं।
उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति 'जंगल के कानून' जैसी हो सकती है जहां कमजोर देशों के लिए जगह कम रह जाती है। इसलिए जरूरी है कि भारत जैसे देश आगे आएं और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने में भूमिका निभाएं।
थरूर का मानना है कि भारत को सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए। उसे एक जिम्मेदार देश के रूप में आगे आना होगा और ग्लोबल साउथ की आवाज बनना होगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कूटनीति का मामला नहीं है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक हितों से भी जुड़ा है। क्षेत्र में शांति और स्थिरता भारत के लिए भी उतनी ही जरूरी है।
Updated on:
09 Apr 2026 07:23 pm
Published on:
09 Apr 2026 07:21 pm
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