Sunanda Pushkar Death Case: सुनंदा की मौत को हत्या मानने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं - कोर्ट

 

Sunanda Pushkar Death Case: दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच में सुनंदा की मौत को सबसे पहले हत्या मानते हुए केस दर्ज किया था। बाद में हत्या से संबंधित धारा को पुलिस ने हटा लिया था।

By: Dhirendra

Updated: 19 Aug 2021, 08:06 PM IST

Sunanda Pushkar Death Case: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ( Shashi Tharoor) की पत्नी सुनंदा पुष्कर ( Sunanda Pushkar ) के मृत पाए जाने के साढ़े सात साल बाद भी सबूतों के आधार पर यह तय नहीं हो पाया कि यह मानव हत्या ( Homicide ) का मामला था या आत्महत्या ( Suicide ) का। दिल्ली पुलिस ( Delhi Police ) की जांच में भी सुनंदा की हत्या के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। जबकि पुलिस ने सुनंदा की मौत को सबसे पहले हत्या मानते हुए केस दर्ज किया, लेकिन बाद में इस धारा को पुलिस ने हटा लिया था।

इस मामले में दो साल बाद उस समय यू-टर्न आया जब अभियोजक ने आरोप तय करने के बिंदु पर बहस करते हुए अदालत से थरूर पर आत्महत्या के लिए उकसाने या वैकल्पिक रूप से उनके खिलाफ हत्या के आरोप तय करने के लिए मुकदमा चलाने का अनुरोध अदालत से किया।

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हत्या का अपराध बताना मुश्किल

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्पेशल जज गीतांजलि गोयल ( Special Judge Geetanjali Goel ) ने सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में आरोपी शशि थरूर को बरी कर दिया। स्पेशल जज ( Special Judge ) ने अपने आदेश में कहा कि पहली नजर में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दर्शाता हो कि यह मामला हत्या की धारा के तहत आता है।

दिल्ली की विशेष अदालत ( Delhi Special Court ) ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित एक मेडिकल बोर्ड ( medical board ) की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर गौर करने के बाद इसी नतीजे पर पहुंचना संभव हो पाया। जबकि प्रारंभिक चरण में जांच इंजेक्शन के निशान की उपस्थिति के कारण सुनंदा की हत्या की दिशा में आगे बढ़ रही थी। लेकिन जांच के दौरान सामने यह आया कि सुनंदा पुष्कर के उपचार के दौरान किम्स, त्रिवेंद्रम में एक प्रवेशनी इंजेक्शन लगाने की वजह से उनके शरीर पर यह निशान था।

पुष्कर के शरीर पर मिले इंजेक्शन के निशान पर कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में 72 घंटे के बाद निशान गायब हो जाता है। लेकिन मृतक के मामले में यह बना रहता है। निशान के आधार पर यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि पुष्कर को किसी जहरीले पदार्थ को इंजेक्ट करने के लिए एक इंजेक्शन दिया गया था।

रसायनिक एजेंट के भी नहीं मिले सबूत

अदालत ने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने लिडोकेन से मौत की संभावना को भी खारिज कर दिया और इंसुलिन सहित किसी अन्य रासायनिक एजेंट ( chemical agent ) के निश्चित सबूत का जिक्र नहीं किया। इसलिए यह नहीं कहा जा सकत है कि कोई रासायनिक एजेंट उनके मौत के कारण थे। अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक द्वारा गठित बोर्ड की ओर से इस संबंध में कोई निश्चित राय नहीं मिलने की वजह से माना है कि अल्प्राजोलम को एक homicidal दवा नहीं माना जाता था।

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एक होटल में मिली थी सुनंदा पुष्कर की लाश

विशेष कोर्ट ने कहा कि 2017 में सौंपी गई साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी रिपोर्ट ( autopsy report ) ने भी इस बात से इंकार किया था कि मौत का कारण हत्या हो सकता है। एसआईटी ने भी जांच के दौरान सामने लाए गए मेडिको-लीगल, हिस्टोपैथोलॉजिकल और अन्य मौखिक, परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के अनुरूप पाया था। बता दें कि 2014 में दिल्ली के एक होटल सुनंदा पुष्कर की लाश मिली थी, जिसके बाद उनके पति शशि थरूर पर उनका मानसिक उत्पीड़न करने और हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा था।

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