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सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ: अदालतों की रिपोर्टिंग कर सकते हैं मीडिया संस्थान, ऑडियो-वीडियो क्लिप पर रोक

क्या मीडिया संस्थान अदालतों की रिपोर्टिंग कर सकते हैं? इस विषय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण दे दिया है।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 06, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

मीडिया का काम होता है लोगों तक खबरें पहुंचाना और इसके लिए अलग-अलग जगह जाना ज़रूरी होता है। इन जगहों में अदालतें भी शामिल हैं, क्योंकि अदालतों में कई बार ऐसे मामले चल रहे होते हैं, जिनकी रिपोर्टिंग करना ज़रूरी होता है और हर फैसले की खबर लोगों तक पहुंचाना अहम होता है। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्पष्टीकरण दे दिया है।

अदालतों की रिपोर्टिंग कर सकते हैं मीडिया संस्थान

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थान अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकते हैं। 31 जुलाई के आदेश में सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि अंतरिम आदेश को अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर पूर्ण रोक नहीं माना जाए। मीडिया कानूनी घटनाक्रम और न्यायिक फैसलों की जानकारी जनता तक पहुंचा सकता है। हालांकि उसे पहले के आदेश में लगाई गई पाबंदियों का पालन करना होगा।

किन पाबंदियों का करना होगा पालन?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया संस्थानों को ज़रूरी पाबंदियों का सख्ती से पालन करना होगा। सुनवाई के ऑडियो-वीडियो क्लिप समाचार कवरेज में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा करना पर पूरी तरह से मनाही है। 24 जुलाई के आदेश में बिना अनुमति अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग निकालने, प्रसारित करने, पोस्ट करने, अपलोड करने, दोबारा पोस्ट करने, संशोधित करने, संग्रहित या होस्ट करने पर रोक लगाई गई थी।

ऑडियो-वीडियो इस्तेमाल पर पाबंदी जारी

अदालती कार्यवाही के दौरान अगर कोई मीडिया संस्थान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करता है, तो इसे पूरी तरह से गलत माना जाएगा और सुप्रीम कोर्ट ने यह बात पूरी तरह से साफ कर दी है।

पूर्व अनुमति लेनी ज़रूरी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि अदालतों में अगर मीडिया संस्थान को ऑडियो-वीडियो का इस्तेमाल करना है, तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के महासचिव या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से पूर्व अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग संबंधी मॉडल नियम लागू करने का प्रस्ताव मांगा है। सभी हाईकोर्ट से मॉडल नियमों को अपनाने और लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवहार्यता पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी गई है। मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।