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BJP नेता शाहनवाज हुसैन के खिलाफ दर्ज होगी रेप की FIR, हाईकोर्ट के फैसले को SC ने रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने BJP नेता शाहनवाज हुसैन को झटका दिया है, जिसके बाद अब उनके खिलाफ रेप का मामला दर्ज होगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हुसैन की उस याचिका को खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
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नई दिल्ली

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Abhishek Kumar Tripathi

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Updated: 16 Jan 2023, 4:46 PM IST

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Supreme Court dismisses BJP leader Shahnawaz Hussain's plea against HC order for FIR over alleged rape

BJP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शाहनवाज हुसैन की उस याचिका को खारिज कर दी है, जिसमें रेप की शिकायत में उनके खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। शाहनवाज हुसैन पर रेप के आरोप के साथ FIR दर्ज करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया था, जिसके बाद शाहनवाज ने याचिका के माध्यम से इस आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने शाहनवाज हुसैन की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है, जिसके बाद अब उनके खिलाफ रेप सहित अन्य धाराओं में FIR होगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में शाहनवाज हुसैन के खिलाफ FIR दर्ज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन आज इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि हमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला है।


शाहनवाज हुसैन के वकील ने महिला की शिकायत को बताया था फर्जी

इससे पहले शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान शाहनवाज हुसैन के वकील ने दलील देते हुए कहा था कि महिला की शिकायत फर्जी व दुर्भावनापूर्ण है। वहीं न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने शाहनवाज हुसैन की ओर से पेश वकील से कहा कि "निष्पक्ष जांच होती है और अगर उन्होंने कुछ नहीं किया है तो वह बरी हो जाएंगे।

क्या है पूरा मामला
2018 में दिल्ली की एक महिला ने कथित रेप के लिए शाहनवाज हुसैन के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया था, इस आरोप को शाहनवाज हुसैन ने नकार दिया था। इसके बाद मजिस्ट्रेटी अदालत ने 7 जुलाई 2018 को उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा था कि शिकायत में संगीन अपराध बनता है, जिसके बाद हुसैन ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए तुरंत FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सवाल किया था कि "पुलिस की रिपोर्ट में चार मौकों पर पीड़िता के बयान दर्ज किया गया है, लेकिन इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं था कि FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। मौजूदा मामले में ऐसा लगता है कि पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने में भी पूरी तरह आनाकानी कर रही है।"

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