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कोविड वैक्सीनेशन नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- टीका लगवाने के लिए लोगों को बाध्य नहीं किया जा सकता

देशभर में कोरोना वायरस का खतरा अभी टला नहीं है। चौथी लहर की आहट के बीच केंद्र सरकार लगातार वैक्सीनेशन बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस बीच देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति को लेकर प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने कहा है कि, वैक्सीन लगवाने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है।
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नई दिल्ली

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Dheeraj Sharma

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Updated: 2 May 2022, 11:58 AM IST

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देशभर में कोरोना वायरस का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। दैनिक मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। कुछ राज्यों में तो हालात चिंताजनक बने हुए हैं। यहां ना सिर्फ दैनिक मामलों में इजाफा हो रहा है बल्कि पॉजिटिविटी रेट भी बढ़ा हुआ है। यही वजह है कि, केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक कई कड़े कदम उठा रही हैं। वहीं इस बीच सबसे बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्री की टीकाकरण नीति को लेकर बड़ी बात कही है। शीर्ष अदालत ने केंद्र की कोविड वैक्सीनेशन पॉलिसी को सही ठहराया है, लेकिन इसको लेकर अहम टिप्पणी भी की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम सुझाव भी दिए हैं।

देश में कोरोना की चौथी लहर की आहट के बीच सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि, देश में जो टीकाकरण की नीति है वो सही है, लेकिन देश के किसी भी नागरिक को जबरदस्ती वैक्सीन नहीं लगाया जा सकता है।

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अनुच्छेद 21 का हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित है, हालांकि, किसी को भी टीका लगवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि, अपने शरीर पर अधिकार होना अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। यही वजह है कि किसी को भी कोरोना की वैक्सीन लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

महामारी में सरकार बना सकती है नीति
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि, किसी के जबरदस्ती गलत है, लेकिन महामारी जैसे गंभीर हालातों में केंद्र सरकार जरूरी नीति बना सकती है। इसके तहत सरकार बड़े और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कुछ शर्तें भी रख सकती है। इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत ने वैक्सीनेशन अनिवार्य किए जाने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया सुझाव
शीर्ष अदालत ने सरकार को सुझाव दिया कि कोविड टीका न लगवाने वाले लोगों को सार्वजनिक सुविधाओं के इस्तेमाल से रोकने के आदेश राज्य सरकारों को हटा लेने चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल का आंकड़ा सार्वजनिक करने के लिए भी कहा।

यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोरोना के दुष्परिणामों को प्रकाशित करें। कोर्ट ने ये भी साफ किया है केंद्र सरकार की मौजूदा कोविड वैक्सीनेशन नीति अनुचित या मनमानी नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि, महामारी के दौरान टीकाकरण लोगों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी था, ऐसे में सरकार की नीति को गलत नहीं कहा जा सकता है।

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