4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Supreme Court : काम के दबाव के चलते जजों से होती हैं गलतियां, जानें, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने भारत की जनसंख्या के मुकाबले जजों की संख्या का अनुपात काफी कम रहने पर चिंता जताई है। एक निर्देश के अनुसार 10 लाख की जनसंख्या पर कम से कम 50 जज होने चाहिए लेकिन अभी यह संख्या बेहद कम है।
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Swatantra Mishra

•

Updated: 29 Nov 2024, 1:04 PM IST

Supreme Court

Supreme Court

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने देश में जनसंख्या के मुकाबले जजों की कम संख्या होने पर अफसोस जताते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर काम का अत्यधिक तनाव (Workload on Supreme Court) रहता है, जिसके कारण उनसे गलतियां हो जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को याद दिलाया कि 2002 में दिए फैसले में 2007 तक निचली अदालतों में 10 लाख जनसंख्या पर 50 जज होने के निर्देश दिए गए थे लेकिन 2024 तक यह अनुपात 25 जजों तक भी नहीं पहुंचा है।

सुप्रीम कोर्ट ने किस संदर्भ में की टिप्प्णी

जस्टिस अभय एस.ओका, जस्टिस ए.अमानुल्लाह और जस्टिस एजे मसीह की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले में सैशन जज के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को रद्द करने को दायर याचिका पर फैसले में यह टिप्पणी की। बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले से ये टिप्पणियां हटाने के निर्देश दिए।

व्यक्तिगत आलोचना से बचें : SC

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट को निचली अदालत के आदेशों को रद्द करते समय न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत आलोचना से बचना चाहिए। कई अच्छे फैसले लिखने के बाद जज काम के दबाव या अन्य कारणों से किसी फैसले में गलती कर सकता है।

यह भी पढ़ें - Supreme Court: ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने मां, पत्नी और बेटी की हत्या के आरोपी को मृत्यदंड की दी थी सजा, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कर दिया बरी?