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बिना किसी नोटिस के दिल्ली में कई इलाकों की पानी सप्लाई बंद, बड़ी वजह सामने आई

भीषण गर्मी के बीच Yamuna का जलस्तर गिरने से Delhi में 25% पानी की कटौती की गई है। बिना नोटिस सप्लाई बंद होने से द्वारका और पटेल नगर में हाहाकार मच गया है।
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भारत

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Ankit Sai

May 25, 2026

delhi water

दिल्ली में पानी का भारी संकट (AI PHOTO)

Delhi Water Crisis: भीषण गर्मी के बीच दिल्ली में पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। यमुना नदी (Yamuna River) का जलस्तर खतरे के निशान 674.5 फीट से गिरकर 669.8 फीट पर पहुंच गया है, जिससे वजीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ठप होने की कगार पर हैं। इसके चलते सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट दिल्ली के कई इलाकों में बिना पूर्व सूचना के 25% तक पानी की कटौती कर दी गई है। द्वारका, पटेल नगर और पश्चिम विहार जैसे क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। संकट से निपटने के लिए आपातकालीन पंप और नावें तैनात करने की तैयारी चल रही है, जबकि इस मुद्दे पर सियासी घमासान भी तेज हो गया है।

यमुना का वाटर लेवल क्रिटिकल मार्क से नीचे, डीजेबी के छूटे पसीने

वजीराबाद बैराज और उसके पास का तालाब दिल्ली को पानी देने का सबसे मुख्य जरिया है। दोनों प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए पानी का लेवल समुद्र तल से 674.5 फीट होना बेहद जरूरी है। लेकिन इस समय हालात काबू से बाहर हो चुके हैं। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वजीराबाद प्लांट से रोज करीब 134 मिलियन गैलन पानी की सप्लाई होती है, जबकि चंद्रावल प्लांट से 98 मिलियन गैलन पानी निकलता है। अब इन दोनों के ठप पड़ने से दिल्ली प्यासी मरने की कगार पर है।

नाव और स्पेशल पंपों से पानी खींचने की तैयारी, हरियाणा से गुहार

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब जल बोर्ड आपातकालीन रास्तों पर विचार कर रहा है। मुनक नहर से पानी को वजीराबाद की तरफ मोड़ने की कोशिशें जारी हैं ताकि कमी को पूरा किया जा सके। इसी बीच जल बोर्ड के एक अन्य अधिकारी ने बताया दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्य हरियाणा के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि हथनीकुंड बैराज से एक्स्ट्रा पानी छुड़वाया जा सके और इस बड़े संकट को टाला जा सके।

इन इलाकों में नहीं आ रहा पानी

इस भीषण जल संकट की सबसे ज्यादा मार दिल्ली के उन इलाकों पर पड़ी है जो डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के आखिरी छोर पर आते हैं। पटेल नगर जे ब्लॉक, वेस्ट पटेल नगर, द्वारका, अंबिका विहार सोसाइटी, पश्चिम विहार, रमेश एनक्लेव और सुदर्शन पार्क में पानी की बूंद-बूंद के लिए लड़ाई शुरू हो गई है। पटेल नगर के निवासी तजिंदर पाल ने कहा कि इलाके के लोगों के लिए दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी जुटाना बेहद मुश्किल हो गया है। नार्थ दिल्ली रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के अध्यक्ष अशोक भसीन ने प्रशासन पर गुस्सा निकालते हुए कहा कि 'इस बार अधिकारियों की तरफ से कोई भी एडवांस एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी, जिससे लोग पहले से पानी स्टोर कर पाते।'

पानी संकट पर केजरीवाल का हमला

इस भारी किल्लत के बीच दिल्ली की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। आम आदमी पार्टी और सत्ता पक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि 'किसने सोचा होगा कि एक दिन देश की राजधानी ऐसी हालत में होगी' इस तीखे हमले पर दिल्ली के जल मंत्री परवेश वर्मा ने तुरंत पलटवार किया और कहा कि 'सच तो यह है कि उन 11 सालों में पानी, सीवर और जल भंडारण पर कोई ठोस काम नहीं हुआ, जितना प्रचार उन्होंने किया, उसके मुकाबले कुछ भी नहीं हुआ।'

डिमांड और सप्लाई में भारी अंतर

दिल्ली की यह कहानी हर साल गर्मियों में दोहराई जाती है। दिल्ली में पानी की कुल अनुमानित मांग 1,250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड सामान्य दिनों में सिर्फ 1,002 MGD पानी ही सप्लाई कर पाता है। यानी आम दिनों में भी 250 MGD की कमी रहती है। मई से जुलाई के बीच जब घरों में पानी की खपत बढ़ती है, तो यमुना का पानी सूखने से यह गैप और ज्यादा चौड़ा हो जाता है।

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