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‘इतना प्यार है तो घर ले जाओ’: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को लगाई फटकार, कुत्तों को खिलाने वालों के लिए बदला नियम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों या बुजुर्गों पर कुत्ते के काटने से मौत या चोट लगने पर राज्य सरकारें भारी मुआवजा चुकाने के लिए तैयार रहें।

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सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों या बुजुर्गों पर कुत्ते के काटने से मौत या चोट लगने पर राज्य सरकारें भारी मुआवजा चुकाने के लिए तैयार रहें, क्योंकि पिछले पांच सालों में नियमों का पालन नहीं किया गया। साथ ही, जो लोग सड़कों पर कुत्तों को खिलाते हैं, उन पर भी जवाबदेही तय की जाएगी। जस्टिस विक्रम नाथ ने तीखे अंदाज में कहा, "इतना प्यार है तो घर ले जाओ! उन्हें अपने घर में रखो, क्यों सड़कों पर घूमकर काटते और डराते फिरें?"

'क्या हम समस्या पर आंखें बंद कर लें?'

तीन जजों की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया) ने 13 जनवरी 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, '9 साल के बच्चे पर कुत्ता हमला करे तो जिम्मेदार कौन? जो संगठन खिलाता है, उसे भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।' जस्टिस मेहता ने जोड़ा, 'क्या हम समस्या पर आंखें बंद कर लें?' कोर्ट ने यूट्यूब पर बच्चों और बुजुर्गों पर हमले के वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दलीलें "वास्तविकता से दूर" हैं।

मवेशी और अन्य आवारा जानवरों को भी हटाने का निर्देश

यह मामला जुलाई 2024 में स्वत: संज्ञान पर शुरू हुआ था, जब दिल्ली में बच्चों पर रेबीज के हमलों की मीडिया रिपोर्ट्स आईं। नवंबर 2025 में कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसे संस्थागत इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखने, स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद ही छोड़ने का आदेश दिया था। कुत्तों को मूल जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। हाईवे से मवेशी और अन्य आवारा जानवर हटाने का भी निर्देश दिया गया।

'अगर प्यार है तो घर में रखें, सड़कों पर नहीं'

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश कभी नहीं दिया, बल्कि Animal Birth Control (ABC) Rules के अनुसार इलाज पर जोर है। लेकिन सिविक बॉडीज की लापरवाही से मौतें और सड़क हादसे हो रहे हैं। फीडर्स के लिए सख्ती: अगर प्यार है तो घर में रखें, सड़कों पर नहीं। महिलाओं पर उत्पीड़न के आरोपों को कानून-व्यवस्था का मामला बताकर FIR दर्ज करने की सलाह दी।

राज्य सरकारों को कोर्ट ने जारी की चेतावनी

यह फैसला पब्लिक सेफ्टी और एनिमल वेलफेयर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी कि नियमों का पालन न करने की सजा भारी होगी। मामले में आगे सुनवाई जारी रहेगी, लेकिन अब राज्य सरकारों और फीडर्स पर दबाव बढ़ गया है।