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Surat Crime: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बुजुर्ग से 41 लाख की ठगी, 122 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसाने की दी धमकी

Surat Cyber Crime: सूरत में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक बुजुर्ग से 41 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने खुद को पुलिस, दूरसंचार कंपनी और आरबीआइ का अधिकारी बताकर 122 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसाने की धमकी दी।
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सूरत

•

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Rakesh Mishra

•

Oct 16, 2026

Digital Arrest

एआई तस्वीर

Digital Arrest Scam: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगों ने नानपुरा में रहने वाले एक बुजुर्ग को 122 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसाने की धमकी दी और उनसे 41 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने खुद को दूरसंचार कंपनी का कर्मचारी, मुंबई पुलिस अधिकारी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) का अधिकारी बताकर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया।

फर्जी दस्तावेज भेजे

इतना ही नहीं, भरोसा जीतने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश और आरबीआइ गवर्नर के नाम से फर्जी दस्तावेज भी भेजे। बैंक खातों में जमा रकम की जांच और सत्यापन के बहाने आरोपियों ने दो बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए रुपए ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने गुरुवार रात मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

घोटाले में फंसाने की धमकी

पुलिस के अनुसार, नानपुरा के टिमलियावाड़ निवासी प्रकाशचंद्र चंपकलाल कपाड़िया के पास 4 सितंबर 2026 को एक महिला का फोन आया। महिला ने अपना नाम राधा कपूर बताया और खुद को दूरसंचार कंपनी से जुड़ा कर्मचारी बताया। उसने प्रकाशचंद्र से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर चार बैंक खाते खोले गए हैं। इन खातों के जरिए 122 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है। यह सुनकर बुजुर्ग घबरा गए। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल किया और खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताया। उसने प्रकाशचंद्र को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने उनके आधार कार्ड, बैंक खातों और सावधि जमा (एफडी) की जानकारी भी हासिल कर ली। पीड़ित की कुल 19 एफडी में 42.62 लाख रुपए जमा थे।

पीड़ित पर दबाव बनाया

साइबर ठगों ने इसके बाद अलग-अलग अधिकारियों के नाम से संपर्क किया। उन्होंने खुद को मुंबई पुलिस और आरबीआइ का अधिकारी बताते हुए पीड़ित पर दबाव बनाया। आरोपियों ने आरबीआइ गवर्नर और बॉम्बे हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश के नाम से फर्जी दस्तावेज व्हाट्सऐप पर भेजे। इन दस्तावेजों पर कथित तौर पर लेटरहेड, हस्ताक्षर, मुहर और लोगो का इस्तेमाल किया गया था। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच चलने और डिजिटल अरेस्ट किए जाने का डर दिखाया। उन्होंने बुजुर्ग को विश्वास दिलाया कि उनके बैंक खातों और जमा रकम का सत्यापन किया जाएगा।

दो खातों में जमा कराए रुपए

आरोपियों ने भरोसा दिया कि रकम की जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। उनकी बातों में आकर प्रकाशचंद्र ने दो अलग-अलग बैंक खातों में क्रमश: 30.50 लाख रुपए और 10.50 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कुल 41 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों में पहुंच गए। रकम मिलने के बाद भी आरोपी जांच जारी होने का बहाना बनाकर कुल मिलाकर 24 दिनों तक पीड़ित के संपर्क में रहे। बाद में उन्होंने व्हाट्सऐप कॉल रिसीव करना बंद कर दिया और रुपए भी वापस नहीं किए। तब प्रकाशचंद्र को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस की शरण ली। साइबर क्राइम पुलिस अब आरोपियों तक पहुंचने और ठगी की रकम का पता लगाने के लिए जांच कर रही है।