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TMC के आरोपों पर भड़कीं सुष्मिता देव, कहा- 15 दिन पहले कुछ और थे, आज कुछ और बोल रहे

Sushmita Dev: तृणमूल कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने पर सुष्मिता देव ने कहा कि उन्होंने सिद्धांतों के आधार पर फैसला लिया है और उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं।
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कोलकाता

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Anand Shekhar

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Shaitan Prajapat

Jul 10, 2026

Sushmita Dev

सुष्मिता देव (File Photo)

Sushmita Dev: तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर हुई आलोचना का सुष्मिता देव ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि TMC नेताओं का दोहरा रवैया अब जनता के सामने आ गया है। देव ने कहा कि TMC नेताओं की बातों को देखें तो वे 15 दिन पहले कुछ और कह रहे थे और आज कुछ और ही कह रहे हैं, राजनीति में ऐसे दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं है। TMC का कहना था कि यदि आप कोई सैद्धांतिक फैसला लेते हैं, तो आपको अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव का सामना करना चाहिए। ठीक वही हुआ।

TMC सांसद सौगत रॉय की बात का जवाब देते हुए सुष्मिता देव ने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान TMC ने लगातार यह नैरेटिव फैलाया कि राज्य का विकास इसलिए रुका हुआ है क्योंकि केंद्र सरकार फंड नहीं दे रही है। लेकिन जनता के बीच इस बात का उलटा असर हुआ। लोगों को समझ आ गया कि TMC के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल का विकास कभी संभव नहीं होगा।

सौगत रॉय के आरोपों पर दिया जवाब

TMC सांसद सौगत रॉय के बयान पर सुष्मिता देव ने कहा कि बंगाल में चुनावों के दौरान TMC ने कहा था कि राज्य में विकास इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि राज्य को केंद्र सरकार से पैसा नहीं मिलता। जनता के बीच यह संदेश गया कि TMC के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में विकास नहीं हो सकता। लोगों को लगा कि अगर बॉर्डर पर बाड़ लगानी हो या इंडस्ट्रीज लानी हों, तो TMC ऐसा नहीं कर सकती। TMC का यह संदेश उन पर ही उल्टा पड़ गया।

सुष्मिता मेरी दोस्त हैं: रिताब्रता बनर्जी

आपको बता दें कि 9 जुलाई को TMC के पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, प्रकाश चिक और सुखेंदु शेखर रॉय BJP में शामिल हो गए। इस पर पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता (LoP) रिताब्रता बनर्जी की प्रतिक्रिया सामने आई है। रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि सुखेंदु शेखर दा के साथ मेरे पुराने संबंध है। वे एक वरिष्ठ राजनेता हैं जिन्होंने अक्सर मेरा मार्गदर्शन किया है। सुष्मिता मेरी दोस्त हैं, हम दोनों 2014 में सांसद बने थे। प्रकाश मेरे छोटे भाई जैसे हैं। अगर वे कोई व्यक्तिगत फैसला लेते हैं, तो इसमें मेरा कोई दखल नहीं है। राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंध बने रहते हैं। लोकतंत्र में उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है। उन तीनों के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं। हो सकता है कि वे मेरे विचारों के विपरीत किसी राजनीतिक रुख को अपनाएं, लेकिन हमारा व्यक्तिगत रिश्ता निश्चित रूप से बना रहेगा।