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‘दूसरे उम्मीदवार को वोट देना अपराध नहीं’, BJD की याचिका पर भड़के सस्पेंड विधायक अरविंद महापात्रा

BJD MLA Arvind Mahapatra Suspension: ओडिशा में BJD की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सस्पेंड विधायक अरविंद महापात्रा ने पार्टी की अयोग्यता याचिका को बेवकूफी भरा कदम बताया।

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भारत

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Saurabh Mall

Jun 22, 2026

BJD MLA Arvind Mahapatra Suspension

बीजेडी के सस्पेंड विधायक अरविंद महापात्रा (फाइल फोटो- ANI)

Odisha Rajya Sabha Election Update: बीजू जनता दल के सस्पेंड विधायक अरविंद महापात्रा ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग को लेकर पार्टी द्वारा दायर अयोग्यता याचिका पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी है। महापात्रा ने इसे ‘बेवकूफी भरा कदम’ बताया। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे उम्मीदवार को वोट देना कोई अपराध नहीं है।

दूसरे उम्मीदवार को वोट देना अपराध नहीं: महापात्रा

अरविंद महापात्रा ने कहा कि किसी विधायक को सिर्फ इसलिए सस्पेंड या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उसने दूसरे उम्मीदवार को वोट दिया है। उनके मुताबिक, ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि BJD का कदम समझ से परे है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को अदालत जाने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है। महापात्रा ने दावा किया कि उन्हें इस मामले को लेकर कोई चिंता नहीं है। उन्होंने पार्टी को सलाह दी कि वह अपनी संगठनात्मक क्षमता मजबूत करने पर ध्यान दे। उनके अनुसार, BJD इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।

राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

दरअसल, ये पूरा विवाद राज्यसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ। चुनाव में BJD उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को कांग्रेस का समर्थन मिला था। इसके बावजूद क्रॉस-वोटिंग ने पूरा समीकरण बदल दिया। BJD और कांग्रेस के कुछ विधायकों के वोट BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में चले गए। इसका फायदा BJP को मिला। पार्टी ने दो सीटें जीत लीं, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में चली गई।

चुनाव के बाद BJD ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए छह विधायकों को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंड किए गए MLA में चक्रमणि कन्हार, नबा किशोर मल्लिक, सौविक बिस्वाल, सुबासिनी जेना, रमाकांत भोई और देवी रंजन त्रिपाठी हैं।

पार्टी का कहना था कि इन नेताओं ने संगठन के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। इससे पहले जनवरी में अरविंद महापात्रा और सनातन महाकुड को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया जा चुका था। अब स्पीकर द्वारा अयोग्यता याचिका खारिज किए जाने और महापात्रा के बयान के बाद यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है।