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तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से पहले AIADMK में फूट? सीवी शनमुगम ने TVK को समर्थन देने का किया फैसला

Tamil Nadu politics: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बाद AIADMK में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं। सीवी शनमुगम गुट ने TVK को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि पार्टी में नेतृत्व और गठबंधन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है।

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AIADMK leader CV Shanmugam

AIADMK विधायक सीवी शनमुगम (बीच में) पार्टी के अन्य नेताओं के साथ। (Photo/ANI)

CV Shanmugam on TVK: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद AIADMK में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम ने फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि उनके साथ करीब 30 विधायक भी हैं, जिससे पार्टी में विभाजन की अटकलें तेज हो गई हैं।

सीवी शनमुगम ने कहा, 'हमने इस पार्टी की स्थापना DMK के खिलाफ की थी। पिछले 53 वर्षों से हमारी राजनीति DMK विरोध पर आधारित रही है। ऐसे में यह प्रस्ताव रखा गया कि DMK के समर्थन से AIADMK की सरकार बनाई जाए, लेकिन पार्टी के अधिकांश सदस्यों ने इसे खारिज कर दिया। अगर हम DMK के साथ गठबंधन करते, तो AIADMK का अस्तित्व ही खत्म हो जाता। इसलिए हमने ऐसी स्थिति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।'

उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल पार्टी किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है और अब प्राथमिकता AIADMK को फिर से मजबूत और सक्रिय बनाने की है। शनमुगम ने कहा, 'आखिरकार हमने विजयी रही TVK सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।'

एडप्पादी पलानीसामी गुट के पास कितने विधायक?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में AIADMK ने कुल 47 सीटें जीती थीं। यदि सीवी शनमुगम गुट के साथ 30 विधायक हैं, तो एडप्पादी के. पलानीसामी के पास केवल 17 विधायक बचते हैं। इसी बीच AIADMK और TVK के बीच संभावित गठबंधन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, शनमुगम गुट से जुड़े कई विधायकों को पुडुचेरी के एक निजी रिसॉर्ट में ठहराया गया है, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

‘AIADMK में पहले ही पड़ चुकी है फूट’

AIADMK के पूर्व नेता केसी पलानीसामी ने भी पार्टी में विभाजन के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और कई विधायक बदलाव चाहते हैं। केसी पलानीसामी ने कहा, 'यदि एडप्पादी के पलानीसामी नेता बने रहते हैं, तो कुछ विधायक TVK को समर्थन दे सकते हैं।' उन्होंने यह भी दावा किया कि हालांकि एडप्पादी के पलानीसामी आधिकारिक तौर पर पार्टी के महासचिव हैं, लेकिन पार्टी के भीतर बड़ी संख्या में नेता और विधायक उनके साथ नहीं हैं।