शुभेन्दु अधिकारी ने इस घटना की निंदा की और कुणाल घोष के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुणाल घोष न केवल कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे, बल्कि वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अखरुज्जमां के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार करने पर भी उतारू थे। लोकतंत्र में ऐसी गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद या विधानसभा में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी वरिष्ठ सदस्य के भाषण में बाधा डालना और आक्रामक व्यवहार करना स्वीकार्य नहीं है।