
ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी(एआई इमेज-चैटजीपीटी)
TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने अपनी ही पार्टी के दो विधायकों संदीपन साहा और रीताब्रता बनर्जी के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर कर दिया है। पार्टी का कहना है कि दोनों नेताओं की गतिविधियां संगठन के हितों के खिलाफ पाई गईं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य की राजनीति पहले से ही कई विवादों को लेकर चर्चा में है।
पार्टी नेतृत्व की ओर से दोनों विधायकों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वे लंबे समय से संगठन द्वारा बुलाई जाने वाली महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे। इसके अलावा उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का भी आरोप लगाया गया है। टीएमसी का कहना है कि दोनों नेताओं ने कई मौकों पर ऐसे सार्वजनिक बयान दिए, जो पार्टी की राजनीतिक रणनीति और हितों के विपरीत थे। पार्टी नेतृत्व ने इन गतिविधियों को गंभीर मानते हुए पूरे मामले की समीक्षा की और अंततः निष्कासन का फैसला लिया।
मीडिया से बात करते हुए रीताब्रता बनर्जी ने कहा कि दीदी एक सम्मानित नेता हैं। दीदी का राजनीतिक संघर्ष रहा है। लेकिन जिस तृणमूल को उन्होंने बनाया था, यह वह तृणमूल नहीं है। तृणमूल अब एक कॉर्पोरेट एजेंसी बन गई है। अभिषेक बनर्जी पर बोलते हुए रीताब्रता ने कहा कि उनसे मिल पाना भी मुश्किल होता है। अपने बयान में उन्होंने आगे जोड़ा कि अभिषेक बनर्जी ने पार्टी में कई बदलाव किये जो सही नहीं है। उससे पार्टी को नुकसान हुआ।
सोमवार को राज्य सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि विधानसभा में सामने आए कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर जो शिकायतें दर्ज की गई थीं, वे संदीपन साहा और रीताब्रता बनर्जी की ओर से की गई थीं। बताया जा रहा है कि यह विवाद उस पत्र से जुड़ा है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में समर्थन देने की बात कही थी। हालांकि टीएमसी ने अपने निष्कासन आदेश में सीधे तौर पर इस मामले का उल्लेख नहीं किया है।
Published on:
01 Jun 2026 08:54 pm
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