
भाजपा विधायक शंकर सिकदर। ( फोटो: ANI)
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सियासत में तूफान मचा हुआ है। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में बगावत के बाद रोज कई बागी नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। वे उनसे दूरी बना रहे हैं और अपने बयानों से बता रहे हैं कि वे ममता के साथ नहीं हैं। टीएमसी के 20 बागी किसके साथ हैं, यह सवाल भी गहरा गया है। वे भाजपा के साथ हैं या एनसीपी के साथ हैं। इन सांसदों के बारे में भाजपा विधायक शंकर सिकदर ने कहा, 'टीएमसी के बागी नेता त्रिपुरा की एनसीपी (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) में शामिल हो गए हैं। उन्होंने एक नई पार्टी बना ली है। कोई भी पार्टी एनडीए का समर्थन कर सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि वे एनडीए का हिस्सा हैं।' विधायक मदन मित्रा ने टीएमसी के बागी सांसदों पर कहा, 'उन्हें इस बारे में पहले सोचना चाहिए था। 2021 में हमारे पास 77 विधायक थे। उन्होंने सभी विधायकों को धमकाया और उन्हें अपने साथ ले गए… मदन मित्रा को अभी ऐसा लग रहा है, लेकिन दो दिन बाद वे फिर वही करेंगे।'
अब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में चल रही बगावत के बीच बागी टीएमसी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने भी कह दिया है कि ममता बनर्जी टीएमसी की एक भी बैठक बुलाने में विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पार्टी आज ममता बनर्जी से डरी हुई है, वह एक भी बैठक नहीं बुला सकती। वह चुनाव से पहले सिर्फ अपने ही क्षेत्र में बैठक कर रही हैं।
ध्यान रहे कि टीएमसी के 20 सांसद बगावत कर नई पार्टी में शामिल हो चुके हैं, इन बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय करने और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की है। बागी सांसदों में अरूप चक्रवर्ती, सयानी घोष,जगदीश चंद्र बसूनिया ,काकोली घोष, खलीलुर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, मिताली बेग, बापी हलदर,कालिपदा सोरेन, दीपक अधिकारी देव, जून मालिया, डॉ. शर्मिला सरकार, सित कुमार मल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी आदि के नाम शामिल हैं।
टीएमसी के बागी सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर उनसे मुलाकात की थी और इसके बाद बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था, 'हम, एआईटीसी से चुने गए बीस सांसदों ने अध्यक्ष से मुलाकात की और अलग से बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा है, 20 सांसद हमारी कुल संख्या हैं। हम राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी में विलय कर रहे हैं। उसमें कहा था कि हम राष्ट्र के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एनडीए के साथ सहयोग करेंगे।
गौरतलब है कि टीएमसी के नेताओं की बगावत पर भाजपा नेता अनिर्बन गांगुली का बयान भी वायरल हुआ है । उन्होंने कहा है कि इस समय असली टीएमसी और नकली टीएमसी के बीच उथल-पुथल मची हुई है। हम लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि टीएमसी जैसी पार्टी सत्ता के बिना एक महीना भी नहीं टिक सकती। उनका एकमात्र मकसद जनता का शोषण करना और वह भी गलत तरीके से। पार्टी के अंदरूनी लोग भाई-भतीजावाद से परेशान थे,ममता बनर्जी का पार्टी पर कोई नियंत्रण नहीं है।
गांगुली ने बयान में कहा है कि ममता की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में टीएमसी के शायद ही कोई सांसद, विधायक या कार्यकर्ता मौजूद थे,टीएमसी के खेमे में पूरी तरह से भ्रम की स्थिति है,ममता के हाथ कुछ नहीं बचेगा। टीएमसी नेताओं को अब ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा । टीएमसी केंद्र सरकार की योजनाओं के पैसों से चलती थी।भाजपा पिछले 10 सालों से जो कहती आ रही थी, वही बात अब टीएमसी के अंदरूनी लोग कह रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अभिषेक बनर्जी पुलिस और प्रशासन पर नियंत्रण, जबरन वसूली और अहंकार का परिणाम भुगत रहे हैं,टीएमसी को अपनी समस्याओं से खुद निपटने दें, जहां तक हमारा सवाल है, हम बंगाल को फिर से पटरी पर लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
Updated on:
15 Jun 2026 03:04 pm
Published on:
15 Jun 2026 03:02 pm
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