
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर। (Photo - The Washington Post)
Keir Starmer : ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस्तीफा देने की मांग के बीच अपना पद छोड़ने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को मिली करारी हार के बाद उनकी ही पार्टी के कई सांसद उनसे इस्तीफा मांग रहे हैं। लेकिन स्टार्मर ने साफ कह दिया है कि उनका पूरा ध्यान देश चलाने पर है। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें हटाने की कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
हालिया चुनावों में लेबर पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने करीब 1,400 काउंसिल सीटें गंवा दी हैं और वेल्स की संसद से भी उनका कंट्रोल खत्म हो गया है। इसके अलावा स्कॉटलैंड में भी नतीजे खराब रहे। वहीं, दक्षिणपंथी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' और 'ग्रीन पार्टी' ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस हार से निराश होकर लेबर पार्टी के 70 से ज्यादा सांसद पीएम स्टार्मर से इस्तीफा मांग रहे हैं। विरोध जताते हुए कई मंत्रियों के सहायकों ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं।
लंदन में अपनी कैबिनेट के साथ बैठक में स्टार्मर ने कहा, 'देश हमसे सरकार चलाने की उम्मीद करता है और मैं वही कर रहा हूँ।" उन्होंने चुनाव में हार की जिम्मेदारी तो ली, लेकिन यह भी चेतावनी दी कि बार-बार नेता बदलने से देश में अस्थिरता और अराजकता फैलती है, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि वो पुरानी सरकारों जैसी गलती नहीं दोहराएंगे।
लेबर पार्टी के नियमों के मुताबिक, पीएम को चुनौती देने के लिए कम से कम 81 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। फिलहाल बागी सांसद यह आंकड़ा जुटाने में लगे हैं। इस बीच, पूर्व उप प्रधानमंत्री एंजेला रेनर का नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहा है। रेनर ने हाल ही में कहा था कि स्टार्मर को देश की चुनौतियों का डट कर सामना करना होगा और जरूरी बदलाव लाने होंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक पीएम पद के लिए कोई औपचारिक दावा पेश नहीं किया है।
विपक्षी दलों और लेबर पार्टी के बागी सांसदों का कहना है कि स्टार्मर अब जनता और पार्टी दोनों का विश्वास खो चुके हैं। अब 1400 सीटों का नुकसान यह बताता है कि उनकी नीतियां जमीन पर फेल हो गई हैं और उन्हें नैतिकता के आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लेबर पार्टी के बागी सांसद पीएम स्टार्मर को चुनौती देने के लिए जरूरी 81 सांसदों के हस्ताक्षर जुटा पाएंगे? साथ ही, एंजेला रेनर का अगला कदम क्या होगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
बहरहाल, इस पूरी सियासी उठापटक के बीच दक्षिणपंथी 'रिफॉर्म यूके' और 'ग्रीन पार्टी' का उभार लेबर पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। ब्रेक्सिट के बाद यूरोपीय संघ के साथ रिश्ते सुधारने की स्टार्मर की कोशिशें भी जनता को लुभाने में नाकाम साबित हो रही हैं। (इनपुट : ANI)
Updated on:
12 May 2026, 9:49 PM IST
Published on:
12 May 2026, 7:35 PM IST
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