
यूपीएससी की ओर से किए लागू किए गए नए रियल टाइम मोबाइल आधारित चेहरे की पहचान प्रोटोकॉल का एक नजारा। (फोटो : ANI )
UPSC Exam Fairness : नीट-यूजी परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद देश भर से विरोध और असंतोष के स्वर उभरने के बाद अब सरकार फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। इसके लिए एहतियातन कई कदम उठाए जा रहे हैं। अब सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता मजबूत करने और नकल या पेपर लीक पर अंकुश लगाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने चेहरा प्रमाणीकरण प्रोटोकॉल लागू किया है। सरकार का दावा है कि हाल ही में आयोजित सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2026 में चेहरे की पहचान से संबंधित प्रोटोकॉल लागू किया गया था।
यह प्रोटोकॉल यह तय करता है कि आवेदन पत्र भरते समय जिस उम्मीदवार की तस्वीर अपलोड की गई थी, वही परीक्षार्थी परीक्षा देने के लिए प्रवेश पत्र के साथ परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होता है। यूपीएससी के अनुसार, इस प्रणाली ने परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षकों की ओर से मोबाइल फोन आधारित सत्यापन के माध्यम से उम्मीदवारों के लाइव, रियल टाइम फेस वैरिफिकेशन को सक्षम बनाया गया। इस वर्ष की सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 के दौरान, यूपीएससी ने देशभर के सभी 2,072 परीक्षा केंद्रों पर वास्तविक समय चेहरे के वैरिफिकेशन का अभ्यास किया गया।
चेहरे की पहचान करने वाले इस एप्लिकेशन को यूपीएससी की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन (एनईजीडी) के तकनीकी सहयोग से विकसित और कार्यान्वित किया गया है। यूपीएससी ने यह भी कहा है कि उसने एक ऐसी व्यावसायिक प्रक्रिया विकसित की है जिसके तहत प्रत्येक उम्मीदवार को परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति देने से पहले चेहरे की पहचान से गुजरना आवश्यक है। यूपीएससी ने एक बयान में कहा है कि पर्यवेक्षकों को कई चरणों का प्रशिक्षण दिया गया। इस समाधान की खूबी यह है कि इसके लिए किसी महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं है। यह किसी भी एंड्रॉइड स्मार्टफोन पर काम करता है, और पर्यवेक्षकों ने इसके लिए खुद अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया, जिससे हार्डवेयर की लागत कम हो गई और लॉजिस्टिक्स का लोड भी कम हो गया।
इस एप्लिकेशन की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी गति है, और इसमें कहा गया है कि उम्मीदवार का चेहरा वैरिफाई करने के लिए आवश्यक समय केवल 6-8 सेकंड है, जिससे सुचारू प्रवेश सुनिश्चित हुआ है और परीक्षा केंद्रों पर कतार लगने से बचा जा सका। एप्लिकेशन की स्केलेबिलिटी ऐसी थी कि इसका उपयोग एक साथ 7,000 से अधिक पर्यवेक्षकों की ओर से किया जाता था, और व्यस्ततम प्रवेश अवधि के दौरान, एप्लिकेशन प्रति मिनट लगभग 12,000 प्रमाणीकरणों को संसाधित करता था।
यूपीएससी के अध्यक्ष अजयकुमार ने कहा, यह यूपीएससी की ओर से फर्जी परीक्षाएं सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक नया कदम है। यह तकनीक पूरी तरह से एनजीडी की मदद से आंतरिक रूप से विकसित की गई है। हालांकि, चुनौती यह भी थी कि इस समाधान को बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, चेहरे की पहचान के लिए मौजूदा निरीक्षकों का उपयोग किया जाए, उन्हें प्रशिक्षित किया जाए और यह सब कम समय में पूरा किया जाए। यूपीएससी, एनजीडी और मीत्ययु की टीमों ने लगभग 5.5 लाख उम्मीदवारों के लिए 2000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर इतने बड़े पैमाने पर इसे को विकसित और सफलतापूर्वक लागू करने के लिए बेहतरीन काम किया है। (इनपुट : ANI)
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
Updated on:
4 Jun 2026, 7:01 PM IST
Published on:
4 Jun 2026, 7:00 PM IST
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय




