
उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, जोशीमठ आपदाग्रस्त क्षेत्र घोषित, आईटीबीपी ने खाली की कालोनी
जोशीमठ शहर के लगभग डेढ़ किलोमीटर के भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र को आपदाग्रस्त घोषित किया गया है। जोशीमठ का अध्ययन कर लौटी विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया। दीर्घकालिक समाधान के लिए जोशीमठ का जियो टेक्निकल व जियोफिजिकल अध्ययन कराया जाएगा। जिन क्षेत्रों में घरों में दरारें नहीं हैं, वहां भवन निर्माण के लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी। साथ ही हाइड्रोलाजिकल अध्ययन भी कराने का निर्णय लिया गया है। आपदा प्रबंधन सचिव डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया है कि, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की से प्री-फैब्रिकेट घरों के निर्माण के दृष्टिगत प्रस्ताव मांगा गया है। उन्होंने बताया कि प्रभावितों के पुनर्वास के लिए पीपलकोटी, गौचर, कोटीकालोनी समेत कुछ अन्य स्थान चयनित किए गए हैं। भारतीय भूगर्भीय सर्वेक्षण को इन क्षेत्रों का जियो अध्ययन करने के लिए लिखा गया है। जोशीमठ में भू धंसाव के चलते सेना ने किराए के घर में रहने वाले अपने जवानों को अपने कैंपों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
दरार वाले मकान तत्काल खाली करने के निर्देश
जोशीमठ भारत तिब्बत सीमा (चीन के अधिकार क्षेत्र) का अंतिम शहर है। यहां से नीति और माणा घाटियां भारत तिब्बत सीमा से जुड़ती हैं। इस बटालियन के कई जवान जोशीमठ में किराए के मकान में रहते हैं। शहर के मकानों में जिस तरह गहरी दरारें आ रही हैं, वह किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं। किसी अनहोनी से बचने के लिए सेना ने जवानों को ऐसे किराए के मकान तत्काल खाली करने को कहा है, जहां दरारें आ रही है।
सेना, आइटीबीपी, एनटीपीसी, जेपी कंपनी के परिसर भू-धंसाव की जद में
आपदा प्रबंधन सचिव डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि, सेना, आइटीबीपी, एनटीपीसी व जेपी कंपनी के परिसर के कुछेक हिस्से भी भूधंसाव वाले क्षेत्र की जद में है। सेना ने अपने आवासीय परिसर को खाली कर इसे अपने ही परिसर में सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया है। आइटीबीपी भी अपनी कॉलोनी खाली कर रही है, जेपी कंपनी ने भी अपने कुछ आवास खाली कर दिए हैं। एनटीपीसी भी इसकी तैयारी कर रहा है। जोशीमठ में सेना, आइटीबीपी के पास पर्याप्त जगह है, जो सुरक्षित है।
सेना और आईटीबीपी कैंप की ओर बढ़ रहा है भू-धंसाव
भू-धंसाव का क्षेत्र अब सेना और आईटीबीपी कैंप की ओर बढ़ना शुरू हो गया है। कैंप की सड़क धंसने के साथ ही सीमा को जोड़ने वाला मलारी हाईवे धंस गया है। सेना को आवागमन व रसद की दिक्कत हो सकती है।
Updated on:
08 Jan 2023 06:10 pm
Published on:
08 Jan 2023 06:09 pm
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