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Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम् पर कांग्रेस के फैसले से भड़की BJP, केशव के बयान ने खोल दिए सियासत के पुराने पन्ने

BJP Congress Vande Mataram: बीजेपी ने वंदे मातरम् की पूरी रचना की ऐतिहासिक और राष्ट्रीय भूमिका को सामने लाने के लिए देशव्यापी अभियान का ऐलान किया है। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि दो अंतरों के इस्तेमाल का फैसला स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं की सहमति से हुआ था।
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भारत

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Manoj Vashisth

Aug 23, 2026

Vande Mataram Controversy

Vande Mataram ControverVande Mataram Controversysy‘वंदे मातरम्’ को लेकर BJP ने कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Vande Mataram Six Stanzas: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुआ विवाद अब केवल एक गीत के अंतरों तक सीमित नहीं रह गया है। 150 साल पुराने इस राष्ट्रीय गीत की विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और इसके सार्वजनिक गायन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए प्रस्ताव पारित किया है। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस के फैसले पर भाजपा का पलटवार

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1875 में रचा गया मूल ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गया था। उनका आरोप है कि कांग्रेस के पुराने नेतृत्व ने समय के साथ इसकी मूल विरासत को राष्ट्रीय विमर्श से पीछे धकेला और अब राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

केसवन ने कांग्रेस के रवैये को ‘विश्वासघात’ बताते हुए सोनिया गांधी पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत को लेकर कांग्रेस का दृष्टिकोण पार्टी की कथित साम्प्रदायिक राजनीति को दर्शाता है। हालांकि, ये आरोप भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर दोनों दलों की व्याख्याएं अलग-अलग हैं।

अब मुद्दा गीत से आगे, विरासत की राजनीति तक

सीआर केसवन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की और कहा कि मोदी सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करने का काम किया है। दूसरी ओर कांग्रेस का रुख ऐतिहासिक रूप से इस बात से जुड़ा रहा है कि गीत के कुछ हिस्सों को लेकर उठी आपत्तियों के मद्देनजर सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों में इसके शुरुआती दो अंतरों का इस्तेमाल किया जाए।

बीजेपी के प्रस्ताव में क्या-क्या कहा गया?

बीजेपी ने अपने नए पदाधिकारियों की पहली बैठक में वंदे मातरम् की पूरी विरासत और सम्मान को बनाए रखने का प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय गीत को समकालीन राजनीतिक समीकरणों या कथित तुष्टीकरण की राजनीति के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

प्रस्ताव में कांग्रेस कार्यसमिति के 19 अगस्त 2026 के फैसले का स्पष्ट विरोध किया गया। कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरों के इस्तेमाल से जुड़ी 1937 की व्यवस्था को दोहराया है।

छह अंतरों पर क्यों छिड़ी बहस?

बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों का ऐतिहासिक महत्व समझना जरूरी है। पार्टी अब देशभर में अभियान चलाकर गीत की रचना, स्वतंत्रता आंदोलन से उसके संबंध और राष्ट्रीय चेतना में उसकी भूमिका को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है।

बीजेपी ने यह भी कहा कि वह उन ऐतिहासिक परिस्थितियों को सामने लाएगी, जिनमें गीत के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्तियां उठीं और बाद में इसे सीमित रूप में अपनाने की राजनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।

केंद्र के फैसले ने भी बढ़ाई अहमियत

वंदे मातरम् को लेकर केंद्र सरकार की हालिया पहल ने इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना दिया है। सरकार ने इस वर्ष गीत के सभी छह अंतरों के गायन को अनिवार्य करने की व्यवस्था की है। इसके अलावा संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन को मंजूरी दी गई है। नए प्रावधान में राष्ट्रीय गीत के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया ध्रुवीकरण का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी वही व्यवस्था मान रही है, जिसे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने स्वीकार किया था। उनका दावा है कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत राष्ट्रीय नेताओं की सहमति से 1937 में दो अंतरों को अपनाने का निर्णय हुआ था।

खड़गे ने बीजेपी से सवाल किया कि केंद्र में लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद इस मुद्दे पर अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने पूरे विवाद को ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया।

फिलहाल वंदे मातरम् की छह अंतरों वाली पूरी रचना बनाम दो अंतरों की परंपरा का विवाद राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन चुका है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक विरासत का सवाल बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे पुराना संवैधानिक-राजनीतिक निर्णय मानकर बचाव कर रही है।